फिल्म देखने का शौक
अनिल को फिल्मों का बड़ा शौक था। हर शुक्रवार को रिलीज होने वाली फिल्म का पहला शो देखने वे सबसे पहले सिनेमाघर पहुंच जाते थे। पढ़ाई में उनकी रुचि कम थी, लेकिन पिता के दबाव से वे स्कूल जाते थे। जब अनिल 9वीं कक्षा में थे, तब उनके पिता को काम की वजह से बाहर जाना पड़ा, जिससे अनिल पर कोई नजर रखने वाला नहीं था। इसका परिणाम यह हुआ कि वे 10वीं कक्षा में मुश्किल से थर्ड डिवीजन से पास हुए।
पिता का विश्वास और आगे की पढ़ाई
जब रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने अनिल के पढ़ाई न करने पर ताने मारे, तो उनके पिता ने उन्हें समझाया कि जिंदगी में बदलाव लाने के लिए पढ़ाई बहुत जरूरी है। इस बात ने अनिल को प्रेरित किया और उन्होंने 12वीं कक्षा सेकंड डिवीजन से पास की। इसके बाद अनिल ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया, जहां उनके पिता ने उन्हें मेहनत करने की सलाह दी।
विश्वविद्यालय में सफलता
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में अनिल ने 71 फीसदी अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। पूरे गांव में यह खबर फैल गई कि जो अनिल 10वीं में मुश्किल से पास हुए थे, वे यूनिवर्सिटी में छा गए। पोस्ट ग्रेजुएशन में अनिल ने टॉप किया और उन्हें गोल्ड मेडल दिया गया। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण वे पीएचडी नहीं कर सके और यूजीसी स्कॉलरशिप भी उन्हें नहीं मिली।
आईपीएस बनने का सफर
अनिल ने पीपीएस की परीक्षा दी और डीएसपी के पद पर सेलेक्ट हो गए। परिवार में खुशी का माहौल था और अनिल ने यूपीएससी की परीक्षा देने का निर्णय लिया। लेकिन इसी दौरान उनके पिता का निधन हो गया और परिवार की जिम्मेदारी अनिल पर आ गई। यूपीएससी का सपना अधूरा रह गया, लेकिन डीएसपी के पद पर उनकी कड़ी मेहनत ने उन्हें पहचान दिलाई और 2002 में उन्हें आईपीएस कैडर प्रदान किया गया।

पुलिस सेवा में योगदान
अनिल राय उत्तर प्रदेश में बस्ती रेंज के आईजी और पीएसी के डीआईजी भी रहे। उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें दो बार राष्ट्रपति पुलिस मेडल मिला। अनिल ने साबित कर दिया कि यदि मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सरकारी स्कूल में पढ़े अनिल ने 35 साल की शानदार पुलिस सेवा के बाद रिटायरमेंट लिया।
बचपन की यादें
अनिल बताते हैं कि उनके समय में सभी बच्चों को बैठने के लिए घर से बोरा लाना पड़ता था और खुद ही क्लासरूम की सफाई भी करनी पड़ती थी। यह संघर्ष उनकी सफलता की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस प्रकार, अनिल कुमार राय की कहानी हमें यह सिखाती है कि मेहनत, लगन और अपने ऊपर विश्वास के साथ किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
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