Mumbai Rains 2025: मुंबई में 26 मई 2025 की सुबह एक ऐसी बारिश ने दस्तक दी, जिसने पूरे शहर को थाम लिया। साउथ मुंबई से लेकर उपनगरों तक, सड़कें पानी से लबालब थीं और लोकल ट्रेनें रेंग रही थीं। यह मुंबई बारिश 2025 (Mumbai Rains 2025) का पहला आगाज था, जिसने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की तैयारियों की पोल खोल दी। नरीमन पॉइंट, मंत्रालय, हिंदमाता और मस्जिद बंदर जैसे इलाकों में जलभराव ने शहरवासियों को मुश्किल में डाल दिया। बीएमसी ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) पर अप्रत्याशित बारिश की चेतावनी न देने का आरोप लगाया, लेकिन नागरिकों और विपक्ष ने बीएमसी की नाकामी पर सवाल उठाए। इस लेख में, हम इस मुंबई जलभराव समस्या (Mumbai Waterlogging Issue) की कहानी को समझेंगे, जो शहर की चुनौतियों और कमियों को उजागर करती है।
रविवार रात से शुरू हुई बारिश ने सोमवार सुबह तक मुंबई को पानी-पानी कर दिया। नरीमन पॉइंट में 252 मिलीमीटर, सीएसएमटी में 215 मिलीमीटर और कोलाबा में 207 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। साउथ मुंबई में कई जगहों पर 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई, जो सामान्य तौर पर जुलाई में देखी जाती है। कोलाबा वेधशाला ने शाम 5:30 बजे तक 144.3 मिलीमीटर और सांताक्रूज ने 74.3 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की। इस भारी बारिश के साथ 4.75 मीटर की हाई टाइड ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। चर्चगेट स्टेशन, मंत्रालय, ओवल मैदान और ब्रेच कैंडी जैसे इलाके, जो पहले कभी जलभराव का शिकार नहीं हुए थे, इस बार पानी में डूब गए।
हिंदमाता, जो मुंबई का सबसे कुख्यात जलभराव स्थल है, इस बार भी नहीं बचा। बीएमसी ने रविवार को यहाँ डीवाटरिंग पंप शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन एक दिन की देरी ने सड़कों को तालाब में बदल दिया। मस्जिद बंदर में मिनी पंपिंग स्टेशन काम नहीं कर रहा था, जिससे रेलवे ट्रैक पर पानी भर गया और सेंट्रल रेलवे की सेवाएँ बाधित हुईं। मेट्रो सिनेमा और जेजे फ्लाईओवर के नीचे भी पानी जमा हो गया। इन सबके बीच, केम्प्स कॉर्नर में सड़क धंसने की घटना ने सबको चौंका दिया। एक बेस्ट बस इस गड्ढे में फंस गई, हालाँकि कोई हताहत नहीं हुआ। बीएमसी ने तुरंत सड़क को बैरिकेड कर मरम्मत शुरू की।
महिम के निवासियों के लिए यह बारिश एक और आश्चर्य लेकर आई। सवेरा हाउसिंग सोसाइटी के पास समुद्र तट पर एक बड़ा लोहे का टुकड़ा बहकर आ गया। स्थानीय निवासी इरफान माच्छीवाला ने बताया कि सुबह लोग इस भारी धातु को देखकर हैरान थे। माना जा रहा है कि यह टुकड़ा बांद्रा-वर्ली सी लिंक से बहकर आया। अधिकारियों ने नाव भेजकर इसे हटाया। इस घटना ने न केवल सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया, बल्कि शहर की बुनियादी ढांचे की कमियों को भी उजागर किया।
शहर में रविवार रात 8 बजे से सोमवार सुबह 8 बजे तक 18 शॉर्ट सर्किट, 32 पेड़ गिरने और पाँच दीवार ढहने की घटनाएँ दर्ज की गईं। बीएमसी के सबसे बड़े अस्पताल, केईएम में जलभराव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। पैरल में स्थित इस अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) के बाहर पानी भर गया। हालाँकि, अधिकारियों ने तुरंत पंपों और मैनुअल तरीकों से पानी हटाया, जिससे मरीजों को कोई नुकसान नहीं हुआ। फिर भी, यह घटना बीएमसी की मानसून तैयारियों पर सवाल उठाती है।
बीएमसी ने दावा किया था कि उसने मानसून से पहले नालियों की सफाई और डीवाटरिंग पंपों की तैनाती पूरी कर ली थी। 2024-25 के बजट में स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (एसडब्ल्यूडी) विभाग के लिए 3,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसके बावजूद, 417 डीवाटरिंग पंपों में से कई जगहों पर पंप शुरू नहीं हुए। हिंदमाता और गांधी मार्केट जैसे स्थानों पर पंप दोपहर 12 बजे के बाद ही सक्रिय हुए, जिसके बाद पानी कम होना शुरू हुआ। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने कहा कि अब सभी पंप पूरे मानसून के दौरान चालू रहेंगे और स्थानीय जलभराव के कारणों की जाँच की जाएगी।
नागरिकों और विपक्ष ने बीएमसी की तैयारियों को अपर्याप्त बताया। साउथ मुंबई के निवासियों ने निर्माण कार्यों और नालियों की अधूरी सफाई को जलभराव का कारण माना। क्लीन हेरिटेज कोलाबा रेजिडेंट्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर कोलाबा में प्रस्तावित जेटी का निर्माण शुरू हुआ, तो बेस्ट मार्ग, अपोलो बंदर और हेनरी रोड जैसे इलाके भी जलभराव का शिकार हो सकते हैं। इस बीच, किंग्स सर्कल, सायन और दादर टीटी जैसे पारंपरिक जलभराव स्थल इस बार भी पानी में डूबे रहे।
आईएमडी ने मुंबई के लिए रेड अलर्ट जारी किया, जो मंगलवार सुबह 8:30 बजे तक प्रभावी रहा। मौसम विभाग ने भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी। बीएमसी ने नागरिकों से घरों में रहने और आपात स्थिति में डिजास्टर मैनेजमेंट सेल से संपर्क करने की अपील की। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीएमसी के डिजास्टर कंट्रोल सेल का दौरा किया और स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बारिश की तीव्रता और समय दोनों अप्रत्याशित थे, लेकिन राहत कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।
यह बारिश मुंबई के लिए एक सबक थी। शहर, जो हर साल मानसून की मार झेलता है, इस बार समय से पहले बारिश के लिए तैयार नहीं था। अधूरी नाला सफाई, निष्क्रिय पंप और कंक्रीट सड़कों का अंधाधुंध निर्माण जलभराव के प्रमुख कारण बने। मुंबई बारिश 2025 (Mumbai Rains 2025) और मुंबई जलभराव समस्या (Mumbai Waterlogging Issue) ने एक बार फिर शहर की बुनियादी ढांचे की कमियों को सामने ला दिया।
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