राष्ट्रपति का भाषण: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद में अपने भाषण में मोदी सरकार के पिछले दस सालों के कामों का ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में सरकार ने हर क्षेत्र में बहुत अच्छा काम किया है। लेकिन उनके कुछ बयानों पर विपक्ष ने संसद में हंगामा किया। आइए जानते हैं वे कौन से तीन मुद्दे थे जिन पर विवाद हुआ।
1. आपातकाल का जिक्र
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण में 1975 के आपातकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को संविधान पर सीधा हमला कहा। उन्होंने बताया कि उस समय देश में बहुत मुश्किलें आई थीं, लेकिन भारत ने इन कठिनाइयों पर काबू पाया। जैसे ही उन्होंने यह कहा, विपक्ष ने संसद में जोरदार हंगामा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति की इस बात का समर्थन मेज थपथपा कर किया।
2. पेपर लीक को रोकने के कानून पर
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सरकार द्वारा पेपर लीक को रोकने के लिए बनाए गए कानून का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में पेपर लीक न हो, इसके लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं और एक नया कानून भी बनाया है। उन्होंने कहा कि यह कदम देश के युवाओं को उनकी प्रतिभा दिखाने का सही मौका देने के लिए उठाया गया है। इस पर भी विपक्ष ने सदन में शोर मचाया।
3. तीसरी बार स्थिर सरकार के बारे में
राष्ट्रपति ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहली बार लोगों ने घर से मतदान किया और यह चुनाव पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना। उन्होंने बताया कि भारत के लोगों ने लगातार तीसरी बार एक स्थिर और स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाई है, जो पिछले छह दशकों में पहली बार हुआ है। यह चुनाव नीति, नीयत, निष्ठा और निर्णयों पर विश्वास का चुनाव था। राष्ट्रपति के इस बयान पर भी विपक्ष ने सदन में विरोध जताया।
इन तीन प्रमुख मुद्दों पर विपक्ष ने राष्ट्रपति के भाषण के दौरान अपनी असहमति जाहिर की और सदन में जोरदार हंगामा किया।
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