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40,000 करोड़ का महाघोटाला: आरकॉम के पूर्व अध्यक्ष पुनीत गर्ग पर ईडी का शिकंजा, न्यूयॉर्क तक बिछाया था मनी लॉन्ड्रिंग का जाल

पुनीत गर्ग
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नई दिल्ली: कॉर्पोरेट जगत के सबसे बड़े बैंकिंग धोखाधड़ी मामलों में से एक, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के ₹40,000 करोड़ के कथित लोन फ्रॉड में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने कंपनी के पूर्व अध्यक्ष पुनीत गर्ग और वैशाली जयराम माने के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। यह आरोपपत्र प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत पेश किया गया है।

170 पन्नों की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे
ईडी द्वारा दाखिल 170 पन्नों की चार्जशीट में पुनीत गर्ग की भूमिका को विस्तार से रेखांकित किया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि गर्ग ने साल 2001 से 2025 के बीच कंपनी में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए इस घोटाले की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने न केवल सार्वजनिक धन को खुर्द-बुर्द किया, बल्कि अवैध रूप से अर्जित इस राशि को छिपाने और अलग-अलग माध्यमों से ‘लेयरिंग’ (घुमाने) में भी मुख्य भूमिका निभाई।

विदेशी नेटवर्क और ऑफशोर इकाइयां
जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि बैंकों से लिया गया लोन व्यापारिक कार्यों के बजाय निजी लाभ और संपत्तियों के निर्माण के लिए डायवर्ट किया गया:

* मनी ट्रेल: आरकॉम की विदेशी सहायक कंपनियों और ऑफशोर इकाइयों का उपयोग करके धन को भारत से बाहर भेजा गया।
* न्यूयॉर्क कनेक्शन: ईडी के अनुसार, डायवर्ट किए गए इस धन का एक बड़ा हिस्सा न्यूयॉर्क के मैनहट्टन जैसे महंगे इलाकों में निवेश किया गया। विदेशी संपत्तियों की खरीद में इस ‘लॉन्डर्ड मनी’ का इस्तेमाल हुआ है।

बैंकिंग प्रणाली को गहरी चोट
यह मामला 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ा है, जिसने भारतीय बैंकिंग प्रणाली को भारी नुकसान पहुँचाया है। चार्जशीट में वैशाली जयराम माने की भूमिका की भी जांच की गई है, जो इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा मानी जा रही हैं।

अदालत की कार्रवाई
राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट पेश होने के बाद अब इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। ईडी का दावा है कि उनके पास पर्याप्त डिजिटल और दस्तावेजी सबूत हैं जो साबित करते हैं कि कैसे एक दशक से अधिक समय तक इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

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