नोएडा शहर में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। पुलिस ने एक ऐसे शख्स को पकड़ा है जो खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों को ठग रहा था। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी कहानी और इससे जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य।
कौन है यह नकली IAS और कैसे पकड़ा गया?
पुलिस ने जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, उसका नाम कृष्ण प्रताप सिंह है। वह खुद को गृह मंत्रालय में संयुक्त निदेशक बताता था। कृष्ण प्रताप अपने साथ दो गनर और एक ड्राइवर रखता था, ताकि लोगों को लगे कि वह सच में एक बड़ा अफसर है।
पुलिस को किसी खबरी से सूचना मिली कि एक नकली आईएएस अधिकारी घूम रहा है। इसके बाद नोएडा फेस वन थाने की पुलिस ने एक योजना बनाई और हरौला चौकी के पास से कृष्ण प्रताप को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ उसके दोनों गनर प्रवीण और सतेंद्र, और ड्राइवर सचिन पाठक को भी पकड़ा गया।
नकली IAS की करतूतें और बरामद सामान
कृष्ण प्रताप अपने पद का रौब दिखाकर लोगों को फंसाता था। वह उनसे काम कराने का वादा करता और फिर पैसे ऐंठ लेता था। पुलिस ने उसके पास से कई चीजें बरामद की हैं:
- फर्जी आईएएस अधिकारी के विजिटिंग कार्ड
- दो पिस्तौल (जो उसके गनर बिना लाइसेंस के लेकर घूमते थे)
- एक गाड़ी (जिस पर “भारत सरकार” लिखा था)
- एक लैपटॉप
- चार मोबाइल फोन
यह सब सामान दिखाकर वह लोगों को अपना असली अधिकारी होने का यकीन दिलाता था।
जांच और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि कृष्ण प्रताप ने कितने लोगों को ठगा है। ऐसा माना जा रहा है कि उसके निशाने पर मुख्य रूप से शहर के बड़े कारोबारी और अमीर लोग थे।
पुलिस ने कृष्ण प्रताप और उसके तीन साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। अब उनसे पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे घोटाले की तह तक पहुंचा जा सके।
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