महाराष्ट्र

BJP-Shiv Sena Alliance Break: 2014 में चार सीटों की जिद, फडणवीस ने बताया कैसे टूटा बीजेपी-शिवसेना का रिश्ता!

BJP-Shiv Sena Alliance Break: 2014 में चार सीटों की जिद, फडणवीस ने बताया कैसे टूटा बीजेपी-शिवसेना का रिश्ता!

BJP-Shiv Sena Alliance Break: महाराष्ट्र की सियासत में एक पुरानी कहानी फिर से चर्चा में आ गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा राज खोला, जिसने सबको चौंका दिया। उन्होंने बताया कि 2014 में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन (BJP-Shiv Sena Alliance) सिर्फ चार सीटों की वजह से टूट गया था। यह बात उन्होंने सिक्किम के राज्यपाल ओमप्रकाश माथुर के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में कही। उस वक्त की यादें ताजा करते हुए फडणवीस ने यह भी बताया कि कैसे यह टूट उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बन गया। दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने इसके लिए बीजेपी के बड़े नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। आइए, इस पूरी कहानी को करीब से समझते हैं।

यह सब उस समय की बात है, जब 2014 का विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा था। बीजेपी और शिवसेना कई सालों से साथ मिलकर चुनाव लड़ते थे। लेकिन इस बार सीटों के बंटवारे पर बात बिगड़ गई। फडणवीस ने बताया कि बीजेपी ने शिवसेना को 147 सीटें देने का प्रस्ताव रखा था। खुद बीजेपी 127 सीटों पर लड़ना चाहती थी। योजना यह थी कि सरकार बनने पर शिवसेना के पास मुख्यमंत्री का पद होगा और बीजेपी को उपमुख्यमंत्री का पद मिलेगा। लेकिन शिवसेना ने 147 सीटों से चार ज्यादा यानी 151 सीटों की मांग कर दी। फडणवीस ने बिना नाम लिए कहा कि “युवराज” ने इस मांग की घोषणा कर दी थी और वह पीछे हटने को तैयार नहीं थे। यह “युवराज” उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे माने जा रहे हैं। चार सीटों की इस जिद ने गठबंधन को तोड़ दिया।

फडणवीस ने उस वक्त को याद करते हुए एक और बात बताई। उन्होंने कहा कि गठबंधन टूटने के बाद उन्होंने बीजेपी के बड़े नेता अमित शाह से बात की थी। फडणवीस, शाह और ओमप्रकाश माथुर को भरोसा था कि बीजेपी अकेले भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस बारे में चर्चा की। फडणवीस का कहना था कि उन्हें लगा कि उनके साथ सही व्यवहार नहीं हुआ। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी। 2014 के चुनाव में बीजेपी ने अकेले दम पर 122 सीटें जीतीं। इसके बाद शिवसेना फिर से साथ आई और फडणवीस पहली बार मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि शायद नियति ने उनके लिए यही रास्ता चुना था।

इस खुलासे पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की तरफ से भी जवाब आया। सांसद संजय राउत ने कहा कि गठबंधन टूटने की कहानी में कई परतें हैं। उनका दावा था कि बीजेपी के बड़े नेताओं ने पहले से ही शिवसेना से रिश्ता तोड़ने की योजना बना ली थी। राउत ने बताया कि हर सीट पर 72 घंटे तक बातचीत चली थी। उस वक्त ओमप्रकाश माथुर बीजेपी के महाराष्ट्र प्रभारी थे। राउत ने यह भी कहा कि फडणवीस गठबंधन बनाए रखना चाहते थे, लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की वजह से यह मुमकिन नहीं हुआ। यह सुनकर आज की युवा पीढ़ी के लिए सियासत की यह पुरानी कहानी और रोचक हो गई।

2014 का यह गठबंधन टूटना (BJP-Shiv Sena Alliance Break) उस वक्त की सबसे बड़ी सियासी घटना थी। दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। बीजेपी को 122 और शिवसेना को 63 सीटें मिलीं। चुनाव के बाद दोनों फिर साथ आए और सरकार बनाई। लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चला। 2019 में मुख्यमंत्री पद को लेकर फिर से झगड़ा हुआ और गठबंधन पूरी तरह खत्म हो गया। इसके बाद 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की। उनकी अगुवाई में शिवसेना का एक गुट बीजेपी के साथ चला गया। इस बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया। फडणवीस का यह खुलासा उस पुराने झगड़े की जड़ को फिर से सामने लाया।

यह कहानी आज के युवाओं के लिए कई सवाल खड़े करती है। चार सीटों की जिद ने न सिर्फ एक गठबंधन तोड़ा, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत को भी नई दिशा दी। फडणवीस ने उस वक्त को याद करते हुए यह भी कहा कि उनकी मेहनत और पार्टी का भरोसा ही उनकी ताकत बना। दूसरी तरफ, संजय राउत का कहना था कि बीजेपी ने जानबूझकर यह गठबंधन खत्म किया। इस खुलासे ने पुरानी यादें ताजा कर दीं और सियासत में दोस्ती-दुश्मनी की नई बहस छेड़ दी।


#DevendraFadnavis #BJPShivSena #MaharashtraPolitics #AllianceBreak #MumbaiNews

ये भी पढ़ें: MPs Salary Hike: 1.24 लाख सैलरी और 2.81 लाख भत्ते; सांसदों की नई कमाई का पूरा ब्रेकअप!

You may also like