Trump Tariff Policy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ा ऐलान किया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने सभी देशों से अमेरिका में आने वाले सामानों पर नए टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाने की बात कही। इस खबर ने नई पीढ़ी के लिए भी उत्सुकता पैदा की है, क्योंकि यह हमारे रोज़मर्रा के सामानों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने इसे “मुक्ति दिवस” का नाम दिया और कहा कि अब अमेरिका अपने हितों की रक्षा करेगा। इस कहानी में भारत को भी खास जगह मिली है, क्योंकि ट्रंप ने भारत को “ग्रेट फ्रेंड” कहते हुए कुछ राहत दी है। आइए, इसकी पूरी कहानी समझते हैं।
ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। वहाँ उन्होंने एक चार्ट दिखाया, जिसमें दुनिया भर के देशों पर लगने वाले नए “आयात टैरिफ” (Import Tariffs) की जानकारी थी। इस चार्ट में भारत का नाम भी था। ट्रंप ने कहा कि भारत से आने वाले सामानों पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। यह सुनने में भारी लग सकता है, लेकिन जब हम इसे दूसरे देशों से तुलना करते हैं, तो बात साफ हो जाती है। मिसाल के तौर पर, चीन पर 34 प्रतिशत, पाकिस्तान पर 29 प्रतिशत और बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। मतलब, भारत को ट्रंप ने अपने पड़ोसियों की तुलना में कम शुल्क वाला “डिस्काउंट” दिया है।
यह खबर इसलिए भी खास है, क्योंकि ट्रंप ने भारत को दोस्त माना है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका पर 52 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, फिर भी वे भारत के साथ अच्छे रिश्ते रखना चाहते हैं। दूसरी तरफ, चीन और वियतनाम जैसे देशों पर सख्ती दिखाई गई है। वियतनाम पर तो 46 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जो सबसे ज्यादा में से एक है। ट्रंप का कहना था कि कई देश अमेरिका को लूट रहे हैं, और अब वे इसका जवाब देंगे। उनके इस फैसले से “ट्रंप टैरिफ नीति” (Trump Tariff Policy) एक बार फिर चर्चा में आ गई है। नई पीढ़ी के लिए यह समझना जरूरी है कि ये टैरिफ हमारे मोबाइल, कपड़े, और यहाँ तक कि खाने की चीज़ों की कीमतों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कनाडा और मैक्सिको की बात करें, तो उन्हें इस नए शुल्क से छूट मिली है। व्हाइट हाउस ने कहा कि इन देशों के साथ पहले से ही खास समझौते हैं, जिन्हें USMCA कहते हैं। इस समझौते के तहत आने वाले सामानों पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन बाकी सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। ट्रंप ने कनाडा को लेकर कहा कि अमेरिका हर साल उन्हें 200 अरब डॉलर देता है, और अब उन्हें अपने लिए कुछ करना होगा। यह बात नई पीढ़ी को यह सोचने पर मजबूर करती है कि व्यापार में दोस्ती और सख्ती का खेल कैसे चलता है।
ट्रंप ने इस मौके को “मुक्ति दिवस” कहा। उनका मानना है कि ये टैरिफ अमेरिका को मज़बूत बनाएंगे। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों ने अमेरिका की संपत्ति को चुराया है, और अब वक्त आ गया है कि अमेरिका अपनी ताकत दिखाए। यूरोपीय संघ पर 20 प्रतिशत, जापान पर 24 प्रतिशत, और दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। हर देश के लिए अलग-अलग शुल्क तय किए गए हैं, जो यह दिखाता है कि ट्रंप ने हर रिश्ते को ध्यान में रखकर फैसला लिया है। भारत के लिए 26 प्रतिशत टैरिफ को वे एक तरह का सम्मान मानते हैं, क्योंकि यह चीन और पाकिस्तान से कम है।
इस फैसले का असर अभी से दिखना शुरू हो गया है। कई देशों ने कहा कि वे इसका जवाब देंगे। मिसाल के तौर पर, यूरोपीय संघ पहले ही कह चुका है कि वे अमेरिकी सामानों पर भी शुल्क बढ़ा सकते हैं। यह एक तरह का व्यापारिक युद्ध शुरू कर सकता है। नई पीढ़ी के लिए यह समझना दिलचस्प है कि कैसे एक देश का फैसला पूरी दुनिया को हिला सकता है। “आयात टैरिफ” (Import Tariffs) और “ट्रंप टैरिफ नीति” (Trump Tariff Policy) जैसे शब्द अब खबरों में छाए हुए हैं। लोग सोशल मीडिया पर भी इसकी चर्चा कर रहे हैं, और हर कोई जानना चाहता है कि आगे क्या होगा।
यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। हर दिन नई खबरें आ रही हैं। कुछ देश ट्रंप से बात करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि टैरिफ कम हो सके। भारत के लिए यह एक मौका भी हो सकता है, क्योंकि ट्रंप ने हमें दोस्त कहा है। यह देखना बाकी है कि आने वाले दिनों में क्या बदलाव आते हैं। यह खबर नई पीढ़ी को यह भी दिखाती है कि दुनिया कितनी तेज़ी से बदल रही है, और हमें इसे समझने की कितनी ज़रूरत है।