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South Mumbai Water Logging: साउथ मुंबई में पहली बार जलभराव; कफ परेड, ब्रेच कैंडी में बीएमसी की लापरवाही उजागर

South Mumbai Water Logging: साउथ मुंबई में पहली बार जलभराव; कफ परेड, ब्रेच कैंडी में बीएमसी की लापरवाही उजागर

South Mumbai Water Logging: मुंबई की बारिश ने इस बार साउथ मुंबई के निवासियों को चौंका दिया। 26 मई 2025 को हुई भारी बारिश ने शहर के सबसे आलीशान इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी, जो पहले कभी नहीं देखा गया था। नरीमन पॉइंट, ब्रेच कैंडी, कफ परेड और कसरो बाग जैसे इलाकों की सड़कें पानी से लबालब थीं। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को जिम्मेदार ठहराया और मानसून की तैयारियों पर सवाल उठाए। यह घटना न केवल शहर की बुनियादी ढांचे की कमियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि बदलते पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के बीच मुंबई को और बेहतर योजना की जरूरत है। इस लेख में, हम इस घटना के कारणों, प्रभावों और निवासियों की चिंताओं को समझेंगे, साथ ही बीएमसी की तैयारियों पर भी नजर डालेंगे।

साउथ मुंबई, जो अपने ऐतिहासिक महत्व, आर्ट डेको इमारतों और समुद्र तट की खूबसूरती के लिए जाना जाता है, वहां जलभराव की स्थिति ने सभी को हैरान कर दिया। सोमवार सुबह हुई बारिश ने नरीमन पॉइंट में एक घंटे के भीतर 104 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की, जबकि कोलाबा में 83 मिलीमीटर और मालाबार हिल में 63 मिलीमीटर बारिश हुई। ये आंकड़े भले ही मुंबई के लिए असामान्य न हों, लेकिन सड़कों पर पानी का जमाव निश्चित रूप से एक नई बात थी। चर्चगेट के पास ओवल मैदान पानी से लबालब था, और महर्षि कर्वे रोड और दिंशॉ वाच्छा रोड पर जलभराव ने यातायात को ठप कर दिया। केम्प्स कॉर्नर के पास सड़क धंसने और वालकेश्वर रोड पर भूस्खलन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई। चर्चगेट नरीमन पॉइंट रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अतुल कुमार, जो दशकों से साउथ मुंबई में रह रहे हैं, ने बताया कि उन्होंने बैकबे रिक्लेमेशन और मरीन ड्राइव में रहते हुए कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। वे मानते हैं कि सड़कों पर अत्यधिक कंक्रीटीकरण इस समस्या का प्रमुख कारण हो सकता है। कंक्रीट की सतहें पानी को सोखने की बजाय उसे सड़कों पर जमा होने देती हैं, जिससे जलभराव की स्थिति बनती है। यह मुंबई बारिश (Mumbai Rains) और साउथ मुंबई जलभराव (South Mumbai Water Logging) की समस्या को और जटिल बनाता है।

कफ परेड के निवासियों ने भी बीएमसी की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई। कफ परेड रेजिडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. लॉरा डिसूजा ने कहा कि स्टॉर्मवॉटर ड्रेन की सफाई के लिए बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन, भारी बारिश के बाद सड़कें पानी से भर गईं। उन्होंने बीएमसी की मानसून तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पहली बारिश में ही ऐसी स्थिति है, तो पूरे मानसून में क्या होगा? कफ परेड जैसे पॉश इलाकों में जलभराव ने न केवल यातायात को प्रभावित किया, बल्कि निवासियों के दैनिक जीवन को भी बाधित किया।

ब्रेच कैंडी में भी स्थिति कुछ अलग नहीं थी। समुद्र तल से ऊपर होने के बावजूद, नेपियन सी रोड और पुराने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास सड़कें पानी से भर गईं। निवासियों ने तटीय सड़क परियोजना के दौरान किए गए वादों पर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया था कि नया ड्रेनेज सिस्टम पानी को समुद्र में आसानी से ले जाएगा। ब्रेच कैंडी रेजिडेंट्स फोरम की सदस्य नंदिनी छाबड़िया ने बताया कि तटीय सड़क के निर्माण के बाद भी ड्रेनेज सिस्टम प्रभावी नहीं दिख रहा। पंपिंग वैन लगाने के बावजूद सड़कों से पानी निकालने में देरी हुई, जिससे यातायात जाम की स्थिति बनी।

कोलाबा के कसरो बाग कॉलोनी में भी पहली बार जलभराव देखा गया। पारसी समुदाय के इस ऐतिहासिक इलाके में पानी का जमाव निवासियों के लिए एक झटके की तरह था। क्लीन हेरिटेज कोलाबा रेजिडेंट्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष परवेज कूपर ने बीएमसी की आपदा प्रबंधन समिति की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर बीएमसी समय पर नालियों की सफाई करती, तो ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था। निवासियों ने यह भी चिंता जताई कि प्रस्तावित कोलाबा जेटी परियोजना भविष्य में समुद्री जलस्तर के बढ़ने से और समस्याएँ पैदा कर सकती है।

बीएमसी ने अप्रैल 2025 में दावा किया था कि उसने मानसून से पहले जलभराव रोकने के लिए व्यापक तैयारियाँ की हैं। नालियों की सफाई, ड्रेनेज सिस्टम की मरम्मत और डीवाटरिंग पंपों की तैनाती जैसे कदम उठाए गए थे। हालांकि, 26 मई की बारिश ने इन दावों की पोल खोल दी। निवासियों का कहना है कि नालियों में जमा कचरा और अतिक्रमण ने पानी के बहाव को बाधित किया। इसके अलावा, सड़कों पर कंक्रीट की मोटी परत ने प्राकृतिक जल निकासी को और मुश्किल बना दिया। मुंबई बारिश (Mumbai Rains) और साउथ मुंबई जलभराव (South Mumbai Water Logging) की यह स्थिति शहर की दीर्घकालिक योजना और पर्यावरण संरक्षण पर गंभीर सवाल उठाती है।

मुंबई की यह बारिश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र तल के बढ़ने और अनियमित बारिश के पैटर्न ने शहर के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी की हैं। साउथ मुंबई, जो समुद्र से पुनर्जनन की गई जमीन पर बसा है, विशेष रूप से जोखिम में है। 2050 तक, नरीमन पॉइंट, मरीन ड्राइव और कफ परेड जैसे इलाके नियमित बाढ़ का सामना कर सकते हैं। ऐसे में, बीएमसी को न केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान करना होगा, बल्कि दीर्घकालिक योजनाएँ भी बनानी होंगी।

साउथ मुंबई के निवासियों की यह शिकायत सिर्फ जलभराव तक सीमित नहीं है। वे शहर की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने की माँग भी कर रहे हैं। कसरो बाग जैसे ऐतिहासिक इलाकों में जलभराव ने न केवल जीवन को प्रभावित किया, बल्कि समुदाय की सुरक्षा और भविष्य पर भी सवाल उठाए। निवासियों का कहना है कि बीएमसी को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान करना होगा।

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