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Fake Death Certificate: हापुड़ में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र का खेल, दो महिलाएं बोलीं- मैं हूँ असली पत्नी, जानें सच!

Fake Death Certificate: हापुड़ में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र का खेल, दो महिलाएं बोलीं- मैं हूँ असली पत्नी, जानें सच!

Fake Death Certificate: हापुड़ में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं। उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग में काम करने वाले अरुण कुमार वर्मा की 1 जून 2024 को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई। उनकी पत्नी चंद्रकला ने बताया कि उनकी शादी अरुण से 18 नवंबर 2005 को हुई थी और उनके तीन बच्चे हैं। अरुण की मौत के बाद चंद्रकला ने मृतक आश्रित लाभ और ग्रेच्युटी के लिए आवेदन किया। लेकिन उन्हें पता चला कि किसी और महिला ने भी अरुण की पत्नी होने का दावा करते हुए पहले ही आवेदन कर दिया है।

चंद्रकला के मुताबिक, अरुण की मौत कर्णप्रयाग में हुई थी, और वहां से 19 जून 2024 को उनका मृत्यु प्रमाणपत्र जारी हुआ। इस दस्तावेज में साफ लिखा है कि अरुण की मृत्यु चमोली में हुई। लेकिन हैरानी की बात यह है कि हापुड़ की एक अन्य महिला, मीना वर्मा, ने भी खुद को अरुण की पत्नी बताकर हापुड़ नगर पालिका से 19 जुलाई 2024 को एक दूसरा मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया। इस प्रमाणपत्र में अरुण की मृत्यु का स्थान हापुड़ दिखाया गया है।

चंद्रकला ने हापुड़ पुलिस में शिकायत दर्ज की कि मीना वर्मा ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह प्रमाणपत्र बनवाया और अरुण की ग्रेच्युटी और सरकारी नौकरी हथियाने की कोशिश की। चंद्रकला का कहना है कि उनके पति उत्तराखंड में काम करते थे और उनकी मृत्यु भी वही हुई। हापुड़ से जारी प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी है। इस शिकायत के बाद हापुड़ पुलिस ने जांच शुरू कर दी।

हापुड़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर ने बताया कि एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग मृत्यु प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया है। एक महिला का दावा है कि वह अरुण की पत्नी है, और दूसरी महिला ने फर्जी दस्तावेज बनवाए हैं। पुलिस इस बात की तहकीकात कर रही है कि हापुड़ से दूसरा प्रमाणपत्र कैसे और किन तथ्यों के आधार पर जारी हुआ। अगर इसमें कोई अपराध साबित होता है, तो संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

यह मामला अब पुलिस के लिए एक गुत्थी बन गया है। दो महिलाओं के दावों और दो मृत्यु प्रमाणपत्रों ने इस केस को और जटिल बना दिया। चंद्रकला ने बताया कि वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रही हैं, और फर्जीवाड़े की वजह से उन्हें सरकारी लाभ नहीं मिल पा रहा। हापुड़ पुलिस अब दोनों प्रमाणपत्रों की सत्यता और दस्तावेजों की जांच कर रही है। इस मामले में स्थानीय लोगों में भी खूब चर्चा हो रही है।

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