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CBSE age restrictions: 11 साल के बच्चे को 9वीं कक्षा में दाखिला! कोर्ट ने CBSE के उम्र नियमों को दी चुनौती, पढ़ें पूरा मामला!

CBSE age restrictions: 11 साल के बच्चे को 9वीं कक्षा में दाखिला! कोर्ट ने CBSE के उम्र नियमों को दी चुनौती, पढ़ें पूरा मामला!

CBSE age restrictions: भारत में हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार है, फिर चाहे वह कितना ही होनहार क्यों न हो। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसले में 11 साल के एक असाधारण बच्चे को 9वीं कक्षा में पढ़ने की अनुमति दी है। इस बच्चे की बुद्धिमत्ता उम्र से कहीं आगे है, लेकिन स्कूल और CBSE ने उम्र के नियमों का हवाला देकर उसका दाखिला रोक दिया था। कोर्ट ने इस मामले में बच्चे के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा का अधिकार उम्र की सीमा से बंधा नहीं हो सकता। आइए इस मामले और कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी जानते हैं।

एक होनहार बच्चे की कहानी

यह मामला एक 11 साल के बच्चे का है, जो अपनी असाधारण प्रतिभा के लिए जाना जाता है। उसकी माँ ने बताया कि वह शुरू से ही पढ़ाई में बहुत तेज था और हर कक्षा में शानदार नंबर लाता था। उसने पहली से आठवीं कक्षा तक बिना किसी रुकावट के पढ़ाई की। लेकिन जब 9वीं कक्षा में दाखिले की बारी आई, तो स्कूल ने उसकी उम्र को लेकर आपत्ति जताई। स्कूल का कहना था कि बच्चे की उम्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के नियमों के मुताबिक 9वीं कक्षा के लिए कम है। स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया और जन्मतिथि बदलने या नया ट्रांसफर सर्टिफिकेट लाने को कहा।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज विशाल मिश्रा ने 19 अगस्त को इस मामले में फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार किसी भी बच्चे से छीना नहीं जा सकता, भले ही उसकी उम्र नियमों के मुताबिक न हो। बच्चे की माँ ने कोर्ट में दलील दी कि उनके बेटे का IQ बहुत ज्यादा है और डॉक्टरों ने भी उसे असाधारण प्रतिभा वाला बताया है। कोर्ट ने CBSE के नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बच्चा पढ़ाई में इतना तेज है, तो उसे उम्र की वजह से नहीं रोका जा सकता। कोर्ट ने बच्चे को 9वीं कक्षा में दाखिला देने का आदेश दिया।

NEP 2020 के नियम क्या कहते हैं

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, स्कूल शिक्षा को चार चरणों में बांटा गया है। पहला चरण 3 से 8 साल की उम्र के लिए, दूसरा 8 से 11 साल, तीसरा 11 से 14 साल और चौथा 14 से 18 साल के लिए है। 9वीं कक्षा चौथे चरण में आती है, जिसमें बच्चे की उम्र कम से कम 14 साल होनी चाहिए। इस बच्चे की उम्र 11 साल थी, इसलिए CBSE ने दाखिला देने से मना कर दिया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि ये नियम सामान्य परिस्थितियों के लिए हैं, और असाधारण प्रतिभा वाले बच्चों के लिए इसमें लचीलापन होना चाहिए।

पहले भी आए हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है जब कोर्ट ने होनहार बच्चों के पक्ष में फैसला दिया है। जनवरी 2024 में पटना हाई कोर्ट ने एक 10 साल के बच्चे को 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति दी थी। 2022 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक 8 साल की बच्ची को, जिसका IQ 128 था, 8वीं कक्षा में पढ़ने की इजाजत दी थी। सितंबर 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने एक 16 साल की लड़की को NEET परीक्षा देने की अनुमति दी थी, क्योंकि वह अपनी उम्र से आगे की कक्षाओं में पढ़ चुकी थी।

प्रतिभा और उम्र का सवाल

दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. लतिका गुप्ता का कहना है कि हाई IQ को पढ़ाई में आगे बढ़ने का एकमात्र आधार नहीं मानना चाहिए। स्कूल सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं है, बल्कि वहां बच्चे अपने हमउम्र दोस्तों के साथ सामाजिक और भावनात्मक विकास भी करते हैं। छोटी उम्र में बड़ी कक्षाओं में जाने से बच्चे पर मानसिक और सामाजिक दबाव बढ़ सकता है।

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