कॉमेडियन और टीवी स्टार भारती सिंह हाल ही में अपने एक व्लॉग में भावुक नजर आईं। कैमरे के सामने अपनी निजी जिंदगी का एक बेहद संवेदनशील अनुभव साझा करते हुए भारती की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि “शुक्र है मेरी बेटी नहीं हुई, वरना मैं शायद खुद को संभाल नहीं पाती”। उनका ये बयान सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, भारती के इस बयान का मतलब गलत नहीं समझा जाना चाहिए। इसके पीछे एक मां की चिंता, डर और मानसिक संघर्ष छिपा हुआ है, जिसे उन्होंने बेहद ईमानदारी से साझा किया।
डिलीवरी के बाद का मुश्किल दौर
भारती सिंह ने अपने व्लॉग में बताया कि डिलीवरी के बाद वो पोस्टपार्टम फेज से गुजर रही थीं। इस दौरान उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य काफी प्रभावित हुआ था। हार्मोनल बदलाव, नींद की कमी और नई जिम्मेदारियों के कारण वो भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर महसूस कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि उस समय वो खुद को संभालने की हालत में नहीं थीं और अगर उस वक्त उनकी बेटी होती, तो उसे लेकर चिंता और डर उन्हें अंदर से तोड़ देता।
बेटी से नहीं, समाज से था डर
भारती सिंह ने साफ किया कि उनकी बात का मतलब बेटी से नफरत या भेदभाव नहीं है। बल्कि उन्हें डर था समाज की सोच और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में लड़कियों को लेकर जो हालात हैं, उन्हें देखकर वो अंदर से कांप जाती हैं।
भारती ने भावुक होकर कहा कि अगर उन्हें बेटी होती, तो उसकी सुरक्षा, भविष्य और समाज में उसके साथ होने वाले व्यवहार को लेकर वो हर पल डर में जीतीं। इसी डर ने उन्हें ये कहने पर मजबूर कर दिया कि उस वक्त बेटी न होना उनके लिए राहत जैसा था।
एक मां की ईमानदार भावनाएं
भारती सिंह का ये बयान कई महिलाओं की भावनाओं को छू गया। कई मांओं ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्होंने भी डिलीवरी के बाद ऐसे ही डर और मानसिक दबाव महसूस किए थे, लेकिन खुलकर कह नहीं पाईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन और एंग्जायटी आज भी एक अनदेखा मुद्दा है। महिलाएं अक्सर इसे नजरअंदाज करती हैं या समाज के डर से अपनी भावनाएं दबा लेती हैं।
फैंस और सेलेब्स का समर्थन
भारती सिंह के इस व्लॉग के बाद फैंस और कई सेलेब्रिटीज़ ने उनका समर्थन किया। लोगों ने कहा कि भारती ने एक संवेदनशील लेकिन जरूरी मुद्दे पर बात की है। उन्होंने एक मां की मानसिक स्थिति को सामने रखा, जिस पर अक्सर चर्चा नहीं होती।
भारती सिंह का बयान किसी भी तरह से बेटियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि ये एक महिला की मानसिक स्थिति, समाज के डर और मां बनने के बाद की भावनात्मक उथल-पुथल को दर्शाता है। ये घटना हमें ये सोचने पर मजबूर करती है कि मां बनने के बाद महिलाओं को सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक सहयोग भी उतना ही जरूरी है।
ये भी पढ़ें: अमिताभ बच्चन ने सचिन तेंदुलकर के साथ खेला ‘फिंगर क्रिकेट’, वायरल वीडियो ने जीता फैंस का दिल































