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दावोस में महाराष्ट्र के लिए ऐतिहासिक निवेश: 226 अरब डॉलर के समझौते और 40 लाख रोजगार का मार्ग प्रशस्त

Davos 2026
Davos 2026

दावोस, स्विट्जरलैंड: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) 2026 में महाराष्ट्र ने निवेश के मोर्चे पर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य सरकार ने अब तक के सबसे बड़े निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जो महाराष्ट्र को न केवल भारत का बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया का प्रमुख औद्योगिक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

निवेश के मुख्य आंकड़े और लक्ष्य
दावोस सम्मेलन के दौरान महाराष्ट्र ने कुल 30 लाख करोड़ रुपए के निवेश समझौतों (MoUs) पर मुहर लगाई है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने जानकारी दी कि इसमें से:

  • 10 लाख करोड़ रुपए के निवेश के लिए शुरुआती तकनीकी और प्रशासनिक बातचीत पूरी हो चुकी है।
  •  इस भारी-भरकम निवेश से राज्य में आगामी कुछ वर्षों में 40 लाख नए रोजगार सृजित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
  • कुल निवेश का 83 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) है, जो विश्व के 18 अलग-अलग देशों से आ रहा है।
  • शेष 16 प्रतिशत निवेश विदेशी तकनीकी साझेदारी (Foreign Technical Partnership) के माध्यम से आएगा।

एमएमआरडीए (MMRDA) की बड़ी उपलब्धि
सम्मेलन के तीसरे दिन मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 26 अरब अमेरिकी डॉलर के दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। तीन दिनों के भीतर कुल निवेश का आंकड़ा 226 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
इसमें सबसे प्रमुख समझौता टाटा समूह के साथ हुआ है। 11 अरब अमेरिकी डॉलर की इस साझेदारी के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक और नवाचार (Innovation) पर जोर दिया जाएगा, जो राज्य के डिजिटल बुनियादी ढांचे को बदल कर रख देगा।

निवेश की वास्तविकता और समय सीमा
विपक्ष के सवालों और निवेश के धरातल पर उतरने की शंकाओं को दूर करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया:

  • क्रियान्वयन: पिछले साल हुए समझौतों में से 75 फीसदी को पहले ही लागू किया जा चुका है।
  • समय सीमा: वर्तमान समझौतों का प्रभाव जमीन पर अगले 3 से 7 साल के भीतर पूरी तरह दिखाई देने लगेगा।
  • वैश्विक स्तर: निवेश करने वाले समूहों में कई भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं, लेकिन उनका विस्तार दुनिया के करीब 165 देशों में है, जो उनकी वैश्विक क्षमता को दर्शाता है।

महाराष्ट्र सरकार की इस सक्रियता ने वैश्विक निवेशकों के बीच राज्य की “Ease of Doing Business” वाली छवि को और मजबूत किया है। सेमीकंडक्टर, एआई, ग्रीन एनर्जी और बुनियादी ढांचे में आ रहा यह निवेश आने वाले दशक में महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को ‘ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ बनाने में रीढ़ की हड्डी साबित होगा।

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