Cyber Crime: मुंबई से साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का प्रमुख बनकर फोन करने वाले ठग ने 16 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठग ने खुद को उच्च पदस्थ अधिकारी बताकर डर और दबाव के जरिए इस वारदात को अंजाम दिया।
फोन कॉल से शुरू हुआ पूरा खेल
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित बुजुर्ग को एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को एनआईए का चीफ बताया। कॉलर ने दावा किया कि बुजुर्ग का नाम एक बड़े मामले से जुड़ा है और दिल्ली में हुए कथित बम ब्लास्ट की जांच में उनका खाता संदिग्ध पाया गया है। इस बात को सुनकर बुजुर्ग घबरा गए।
डर और गोपनीयता का बनाया दबाव
ठग ने पीड़ित से कहा कि अगर उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और गिरफ्तारी भी हो सकती है। साथ ही यह भी कहा गया कि मामला ‘अत्यंत गोपनीय’ है और किसी को इसकी जानकारी नहीं दी जानी चाहिए। डर और भ्रम की स्थिति में बुजुर्ग ठग के झांसे में आ गए।
कई किस्तों में ट्रांसफर कराए पैसे
कॉलर के निर्देश पर बुजुर्ग ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 16 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। कुछ समय बाद जब कॉल आना बंद हो गया और संपर्क नहीं हो पाया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस जांच में जुटी
मामले की शिकायत मिलते ही मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल सबूतों के आधार पर ठगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह का काम हो सकता है।
पुलिस की लोगों से अपील
पुलिस ने नागरिकों, खासकर बुजुर्गों से अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी या अधिकारी के नाम पर आने वाले कॉल से सतर्क रहें। कोई भी जांच एजेंसी फोन पर पैसे मांगने या खाते में रकम ट्रांसफर करने को नहीं कहती। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं और सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
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