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Farmers Protest: मुख्यमंत्री फडणवीस का बड़ा आश्वासन, क्या थमेगा मुंबई की ओर बढ़ता ‘लॉन्ग मार्च?’

Farmers Protest
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Farmers Protest: अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हजारों किसानों और सरकार के बीच चल रहा गतिरोध अब सुलझता नजर आ रहा है। मंगलवार को अखिल भारतीय किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों की सभी स्वीकृत मांगों को एक निश्चित समय सीमा (Time-bound) के भीतर लागू करने की पूरी गारंटी दी है।

 

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मंत्रालय में दो घंटे चला बैठकों का दौर
किसानों के रुख की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने बातचीत का रास्ता खोला। मंत्रालय में करीब दो घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री और अधिकारी शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से शामिल थे:

  • राजस्व मंत्री: चंद्रशेखर बावनकुले
  • जलसंपदा मंत्री: गिरीश महाजन
  • आदिवासी विकास मंत्री: अशोक उईके
  • अन्य: स्कूल शिक्षा मंत्री दादासाहेब भुसे और वन मंत्री गणेश नाईक।

इन मंत्रियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सरकार किसानों की मांगों को लेकर हर विभाग स्तर पर ठोस रणनीति बना रही है।

मुख्यमंत्री का ‘समयबद्ध’ आश्वासन
बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने न केवल मांगों को स्वीकार किया, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि इन्हें लागू करने की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी। इसमें प्रमुख रूप से वन भूमि अधिकार, कर्ज माफी का क्रियान्वयन और फसलों के उचित दाम जैसे मुद्दे शामिल हैं।

आंदोलन वापसी पर क्या बोले किसान नेता?
किसान नेता अजित नवले ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री ने हमारी मांगों को जल्द से जल्द लागू करने का आश्वासन दिया है। यह हमारी एकजुटता की जीत है।” हालांकि, आंदोलन पूरी तरह समाप्त होगा या नहीं, इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि:
आंदोलन वापस लेने का अंतिम फैसला प्रतिनिधिमंडल अकेले नहीं करेगा। हम अपने आंदोलनकारी साथियों और किसानों के बीच जाएंगे, उन्हें बैठक के विवरण से अवगत कराएंगे और सबकी सहमति के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।”

क्या है किसानों की प्रमुख चिंता?
किसान सभा का मानना है कि पहले भी कई बार आश्वासन मिले हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव की गति धीमी रही है। इस बार किसान ‘गारंटी’ और ‘लिखित समय सीमा’ की मांग पर अड़े हुए हैं ताकि भविष्य में फिर से सड़कों पर न उतरना पड़े।

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