Plane Crash: भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसी कई दर्दनाक घटनाएं दर्ज हैं, जहाँ एक पल की तकनीकी खराबी या खराब मौसम ने देश के दूरदर्शी नेतृत्व को हमसे हमेशा के लिए छीन लिया। ये केवल हवाई दुर्घटनाएं नहीं थीं, बल्कि इन्होंने भारतीय राजनीति में ऐसे शून्य पैदा किए, जिनकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी। इन हादसों के बाद VIP हवाई सुरक्षा मानकों (VIP Flight Protocols) में व्यापक बदलाव किए गए, लेकिन अपनों को खोने का दर्द कम नहीं हुआ।

1. जी.एम.सी. बालयोगी (2002): संसदीय गरिमा के युवा संरक्षक
3 मार्च 2002 को आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना ने देश के सबसे कम उम्र के लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी को हमसे छीन लिया। वे अपनी सौम्यता और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। उनके निधन ने न केवल तेलुगु देशम पार्टी (TDP) को कमजोर किया, बल्कि भारतीय संसद ने एक ऐसा अध्यक्ष खो दिया जिसने सदन की कार्यवाही को एक नई ऊर्जा और अनुशासन दिया था।

2. ओमप्रकाश जिंदल और सुरेंद्र सिंह (2005): हरियाणा के दो स्तंभों का अंत
31 मार्च 2005 को हरियाणा की राजनीति और उद्योग जगत के लिए एक काला दिन था। एक निजी हेलीकॉप्टर क्रैश में प्रख्यात उद्योगपति और तत्कालीन ऊर्जा मंत्री ओमप्रकाश जिंदल तथा कृषि मंत्री सुरेंद्र सिंह का निधन हो गया। ओ.पी. जिंदल न केवल एक सफल व्यवसायी थे, बल्कि वे जनसेवा के प्रति भी उतने ही समर्पित थे। इस एक हादसे ने हरियाणा सरकार और राज्य की विकास योजनाओं को गहरा झटका दिया।

3. वाई. एस. राजशेखर रेड्डी (2009): एक युग का अंत और नई धारा का उदय
2 सितंबर 2009 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी (YSR) का हेलीकॉप्टर नल्लामाला के जंगलों में लापता हो गया। अगले दिन उनके निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। ‘राजन्ना’ के नाम से लोकप्रिय YSR का जाना आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल लेकर आया। उनके निधन के बाद की सहानुभूति लहर और राजनीतिक घटनाक्रम ने ही आगे चलकर राज्य के विभाजन और नई राजनीतिक धाराओं को जन्म दिया।

4. दोरजी खांडू (2011): दुर्गम क्षेत्रों के विकास का चेहरा
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दोरजी खांडू का 30 अप्रैल 2011 को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया। वे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में हवाई यात्रा के माध्यम से विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रयास करते थे। उनका जाना पूर्वोत्तर की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति थी, क्योंकि उन्होंने सीमावर्ती राज्य में स्थिरता और विकास की नींव रखी थी।

5. विजय रुपाणी (2025): गुजरात की सादगी का दुखद अंत
हाल ही में 12 जून 2025 को हुई अहमदाबाद हवाई अड्डे के पास की विमान दुर्घटना ने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को हमसे छीन लिया। लंदन अपनी बेटी के पास जाते समय एयर इंडिया के इस विमान हादसे ने सभी को झकझोर दिया। वे एक शांत स्वभाव के और सादगी पसंद नेता थे, जिन्होंने कठिन समय में गुजरात का नेतृत्व किया था। उनके निधन से राज्य ने एक समर्पित लोकसेवक खो दिया।
सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल और बदलाव
इन हादसों ने बार-बार हवाई सुरक्षा और हेलीकॉप्टर के रखरखाव (Maintenance) पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- DGCA के कड़े नियम: इन घटनाओं के बाद, विशेष रूप से YSR रेड्डी के हादसे के बाद, रात में उड़ानों और खराब मौसम में VIP मूवमेंट को लेकर नियम बेहद सख्त किए गए।
- दो पायलट की अनिवार्यता: VIP उड़ानों के लिए दो अनुभवी पायलटों और नियमित तकनीकी ऑडिट को अनिवार्य किया गया।
इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी बड़े नेता का विमान या हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उस राज्य या देश की जनभावनाएं गहराई से प्रभावित हुईं। भले ही हम आज तकनीकी रूप से उन्नत हो गए हैं, लेकिन इन महापुरुषों की कमी हमेशा खलेगी।






























