रेलवे मंत्रालय ने रिटायर होने वाले रेल कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़ी एक पुरानी परंपरा को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब से सेवानिवृत्ति के दिन रेलवे कर्मियों को 20 ग्राम का गोल्ड प्लेटेड चांदी का सिक्का उपहार में नहीं दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने इस संबंध में सभी ज़ोन और प्रोडक्शन यूनिट्स को आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है। इस आदेश के बाद इस महीने रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी ये सिक्का नहीं मिलेगा।
गौरतलब है कि रेलवे में कई परंपराएं अंग्रेज़ी शासनकाल से चली आ रही हैं। समय के साथ इनमें बदलाव किए जा रहे हैं और अब रिटायरमेंट से जुड़ी इस परंपरा पर भी विराम लगा दिया गया है।
2006 से चली आ रही थी ये व्यवस्था
रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों को रिटायरमेंट के अवसर पर चांदी का सिक्का भेंट करने की परंपरा मार्च 2006 में शुरू की गई थी। उस समय निर्णय लिया गया था कि वॉलंटरी रिटायरमेंट लेने वाले या निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप करीब 20 ग्राम का गोल्ड प्लेटेड सिल्वर क्वाइन दिया जाएगा।
शुरुआती दौर में इस सिक्के की कीमत लगभग एक हजार रुपये थी, लेकिन वर्तमान समय में इसकी कीमत बढ़कर करीब 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
फैसले के पीछे बढ़ती कीमत और गड़बड़ियों की आशंका
रेलवे से जुड़े अधिकारियों और सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के पीछे चांदी की बढ़ती कीमत और सिक्कों की गुणवत्ता को लेकर सामने आई शिकायतें एक बड़ी वजह हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश से आई एक रिपोर्ट में ये सामने आया था कि रिटायरमेंट पर दिए गए कुछ चांदी के सिक्के मिलावटी थे।
जांच में पाया गया कि इन सिक्कों में चांदी की मात्रा बेहद कम थी और अधिकांश हिस्सा तांबे का बना हुआ था। इससे ये आशंका जताई गई कि सिक्कों की खरीद और सप्लाई प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
सभी ज़ोन को भेजा गया आधिकारिक पत्र
रेलवे बोर्ड की ओर से सभी ज़ोन और प्रोडक्शन यूनिट्स के प्रमुखों को भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब गोल्ड प्लेटेड सिल्वर क्वाइन या मेडल देने की परंपरा पूरी तरह समाप्त की जाती है।
पत्र में ये भी निर्देश दिया गया है कि रेलवे के पास पहले से खरीदे गए या स्टॉक में मौजूद चांदी के सिक्कों का पूरा लेखा-जोखा रखा जाए और उन्हें अन्य उपयुक्त कार्यों में इस्तेमाल किया जाए, ताकि उनके दुरुपयोग या गुणवत्ता को लेकर किसी तरह की चिंता न रहे। इस निर्णय को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है।
चिट्ठी में नहीं बताई गई स्पष्ट वजह
हालांकि रेलवे बोर्ड की चिट्ठी में इस फैसले की कोई औपचारिक वजह नहीं बताई गई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बाहर के वेंडरों से खरीदे गए सिक्कों की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे थे। इसके अलावा चांदी की बढ़ती कीमत के कारण खर्च में कटौती करना भी जरूरी हो गया था।
तुरंत प्रभाव से लागू हुआ आदेश
रेलवे बोर्ड का ये फैसला तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यानी अब भविष्य में रिटायर होने वाले किसी भी रेलवे कर्मचारी या अधिकारी को सेवानिवृत्ति के दिन चांदी का सिक्का उपहार में नहीं दिया जाएगा।
रेलवे का ये कदम न सिर्फ खर्चों पर नियंत्रण बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी एक अहम फैसला माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें: अरिजीत सिंह ने अचानक प्लेबैक गायन छोड़ने का ऐलान किया, सेलेब्स भी हैरान































