गुरुग्राम से एक दुखद घटना सामने आई है, जिसमें 9वीं कक्षा की 13 वर्षीय छात्रा ने परीक्षा के दबाव और पढ़ाई से तनाव के कारण आत्महत्या कर ली। लड़की ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उसे समझ नहीं आ रहा कि पढ़ाई कहां से शुरू करें और कितनी मेहनत करे।
परिवार और स्थानीय पुलिस के अनुसार, ये मामला गुरुग्राम के एक आवासीय क्षेत्र का है। छात्रा अपने माता-पिता के साथ रहती थी और पढ़ाई में हमेशा अच्छे प्रदर्शन की कोशिश करती थी। सुसाइड नोट में उसने ये भी लिखा कि लगातार बढ़ते शैक्षणिक दबाव और तनाव ने उसे मानसिक रूप से बेहद परेशान कर दिया था।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल परिवार और पड़ोसी घटना की वजह से सदमे में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले ये दर्शाते हैं कि बच्चों और किशोरों पर शिक्षा और प्रतियोगिता का दबाव कभी-कभी मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है।
मनोवैज्ञानिक और शिक्षक भी अक्सर ये सलाह देते हैं कि बच्चे अपनी पढ़ाई और प्रतियोगिता के दबाव को साझा करें और घर में माता-पिता और परिवार उन्हें मानसिक सहारा दें।
ये घटना शिक्षा प्रणाली और माता-पिता के लिए चेतावनी है कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक स्थिति पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है जितना कि उनकी अकादमिक प्रगति पर।
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