महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एनसीपी को लेकर लगातार चर्चाएं तेज हैं। खासतौर पर ये सवाल सबके मन में है कि एनसीपी कोटे से अगला डिप्टी मुख्यमंत्री कौन होगा। इसी बीच अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम सामने आने लगा है और इस पर अब बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता का बड़ा बयान सामने आया है।
बीजेपी के राज्यसभा सांसद धनंजय महादिक ने कहा है कि मौजूदा हालात में एनसीपी के दोनों गुटों को एक साथ आ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों गुटों के पास मिलकर मजबूत राजनीतिक ताकत है – करीब 40 विधायक और 10 सांसद। ऐसे में पार्टी का एकजुट होना राज्य की राजनीति के लिए बेहतर होगा।
धनंजय महादिक ने सुनेत्रा पवार को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें उप मुख्यमंत्री का पद दिया जाता है, तो वे इस जिम्मेदारी को प्रभावी तरीके से निभा सकती हैं। उनके अनुसार, सुनेत्रा पवार के पास अब राज्यसभा का अनुभव भी है, जो प्रशासनिक और राजनीतिक फैसलों में मददगार साबित हो सकता है।
सीएम फडणवीस से एनसीपी नेताओं की अहम बैठक
इसी बीच शुक्रवार को महाराष्ट्र की सियासत में एक और अहम गतिविधि देखने को मिली। एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। ये बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली, जिसमें छगन भुजबल, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, धनंजय मुंडे सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे। बैठक में एनसीपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल भी शामिल थे। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक अटकलों को और हवा मिल गई है।
लोकसभा हार के बाद राज्यसभा पहुंचीं सुनेत्रा पवार
सुनेत्रा पवार ने 2024 का लोकसभा चुनाव बारामती सीट से लड़ा था, जहां उनका मुकाबला सुप्रिया सुले से हुआ था। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल उठने लगे थे। ऐसे में अजित पवार ने उन्हें राज्यसभा भेजने का फैसला किया। सुनेत्रा पवार ने 25 जून 2025 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली और तब से वे संसद के उच्च सदन की सदस्य हैं।
एनसीपी के विलय को लेकर अंदरूनी सहमति की चर्चा
इन सभी घटनाओं के बीच एनसीपी के सूत्रों ने दावा किया है कि अजित पवार और शरद पवार के बीच पार्टी के विलय को लेकर सहमति बन गई थी। सूत्रों के अनुसार, 8 फरवरी को दोनों गुटों के एक साथ आने की औपचारिक घोषणा की तैयारी थी। हालांकि, 28 जनवरी को हुए एक दर्दनाक हादसे में 66 वर्षीय अजित पवार के निधन के बाद ये प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
फिलहाल, महाराष्ट्र की राजनीति में अनिश्चितता बनी हुई है और आने वाले दिनों में एनसीपी और राज्य सरकार से जुड़े बड़े फैसलों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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