महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का नाम दशकों से खास अहमियत रखता है। इस परिवार से जुड़े कई चेहरे सत्ता और विपक्ष दोनों में प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। इसी राजनीतिक विरासत से जुड़े वरिष्ठ नेता अजित पवार के दो बेटे हैं – पार्थ पवार और जय पवार। दोनों ने अपने जीवन के लिए अलग-अलग रास्ते चुने हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी मौजूदगी भी एक-दूसरे से काफी अलग रही है।
पार्थ पवार: राजनीति में एंट्री, फिर दूरी
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार ने साल 2019 में राजनीति में कदम रखा। उन्होंने मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, जिसे पवार परिवार की राजनीतिक विरासत से जोड़कर देखा गया। ये चुनाव काफी चर्चा में रहा, लेकिन पार्थ पवार को इसमें हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव के बाद पार्थ पवार ने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। न उन्होंने किसी निर्वाचित पद की जिम्मेदारी संभाली और न ही पार्टी में कोई औपचारिक भूमिका ली। इसके बाद उनकी सार्वजनिक मौजूदगी भी काफी सीमित रही। भविष्य में राजनीति में वापसी को लेकर उन्होंने कभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।
बीच-बीच में पार्थ पवार का नाम कुछ व्यावसायिक या जमीन से जुड़े मामलों की खबरों में जरूर आया, लेकिन किसी भी बड़े आपराधिक मामले में उन्हें आरोपी नहीं ठहराया गया। फिलहाल वे लो-प्रोफाइल जीवन जी रहे हैं और सार्वजनिक मंचों पर कम ही नजर आते हैं।
जय पवार: राजनीति से दूरी, कारोबार पर फोकस
अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार हमेशा से ही राजनीति से दूर रहे हैं। उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा और न ही किसी राजनीतिक पद की इच्छा जाहिर की। जय पवार मुख्य रूप से व्यवसाय से जुड़े माने जाते हैं और मुंबई व बारामती के बीच समय बिताते हैं।
हालांकि वे पारिवारिक कार्यक्रमों, सामाजिक आयोजनों और कभी-कभी चुनाव अभियानों के दौरान परिवार के सदस्यों के साथ नजर आ जाते हैं, लेकिन अब तक उन्होंने खुद राजनीति में उतरने को लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। पवार परिवार की मजबूत राजनीतिक पकड़ को देखते हुए उनके भविष्य को लेकर अटकलें जरूर लगती रहती हैं, मगर फिलहाल वे राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं।
पवार परिवार की सियासी विरासत
पार्थ और जय पवार महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक से ताल्लुक रखते हैं। अजित पवार कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाते आए हैं। उनके चाचा शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और एनसीपी के संस्थापक हैं।
परिवार में सुप्रिया सुले बारामती से सांसद हैं, जबकि रोहित पवार जैसे युवा नेता विधानसभा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में पार्थ और जय पवार को लेकर हमेशा ये सवाल बना रहता है कि क्या वे भविष्य में इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगे या अपनी अलग पहचान बनाए रखेंगे।
फिलहाल दोनों भाई अपनी-अपनी राह पर हैं। एक राजनीति से दूरी बनाए हुए, तो दूसरा पूरी तरह उससे बाहर।
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