केंद्र सरकार की श्रम नीतियों और नए लेबर कोड के विरोध में देशभर में 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल और चक्का जाम का आह्वान किया गया है। इस हड़ताल में अब बैंककर्मियों के शामिल होने की पुष्टि हो गई है। सेंट्रल ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा आयोजित इस आंदोलन को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठनों ने समर्थन दे दिया है, जिससे उस दिन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने की संभावना है।
क्यों हो रही है राष्ट्रव्यापी हड़ताल?
देश के प्रमुख ट्रेड यूनियनों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा पिछले नवंबर में लागू किए गए चार नए लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं। इन लेबर कोड के जरिए पहले से मौजूद 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर दिया गया है। ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इन बदलावों से कामकाजी वर्ग के अधिकार कमजोर हुए हैं और नौकरी की सुरक्षा, वेतन तथा सामाजिक सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसी के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का फैसला लिया गया है।
किन संगठनों ने किया हड़ताल का आह्वान?
इस आम हड़ताल का आह्वान सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), हिंद मजदूर सभा (HMS), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC) सहित कई प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने किया है। इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) समेत कुछ किसान संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है।
बैंककर्मियों का समर्थन, सेवाएं हो सकती हैं बाधित
अब इस हड़ताल को बैंककर्मियों का भी समर्थन मिल गया है। देश के सबसे बड़े बैंक कर्मचारी संगठन ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA) ने हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। इसके अलावा ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) जैसे संगठनों ने भी अपने सदस्यों से हड़ताल में भाग लेने की अपील की है।
एआईबीओए के महासचिव एस. नागरंजन ने बताया कि उनका संगठन 12 फरवरी 2026 को होने वाली केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल का समर्थन कर रहा है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से अपील की है कि हड़ताल के दिन वे कोई भी क्लर्क स्तर का कार्य न करें।
बैंक अधिकारियों की भागीदारी तय
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के संगठनों के महासचिवों ने 28 जनवरी को अपने सदस्यों और बैंक इकाइयों को पत्र जारी कर 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया था। पत्र में हड़ताल में शामिल होने के पीछे श्रम कानूनों में बदलाव, निजीकरण की नीतियां और कामकाजी वर्ग पर बढ़ते दबाव जैसे कई कारण गिनाए गए हैं।
पहले भी हो चुकी है बैंक हड़ताल
गौरतलब है कि इससे पहले 27 जनवरी को भी देशभर में बैंक कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर गए थे, जिससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हुई थीं। ऐसे में 12 फरवरी को प्रस्तावित हड़ताल के दौरान भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज ठप रहने की आशंका जताई जा रही है।































