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वॉशिंगटन पोस्ट में बड़ी छंटनी: 300 से अधिक पत्रकारों की नौकरी गई, शशि थरूर के बेटे भी प्रभावित

वॉशिंगटन पोस्ट
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दुनिया के प्रतिष्ठित अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने 4 फरवरी 2026 को अपने कर्मचारियों में बड़े पैमाने पर कटौती का ऐलान किया। इस फैसले के तहत 300 से ज्यादा पत्रकारों और कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। इसे हाल के वर्षों में वैश्विक मीडिया जगत की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक माना जा रहा है।

किन विभागों पर पड़ा असर?

इस छंटनी का असर अखबार के कई प्रमुख विभागों पर पड़ा है।

  • स्पोर्ट्स सेक्शन पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

  • किताबों से जुड़ी कवरेज खत्म कर दी गई है।

  • जेरूसलम और यूक्रेन सहित कई विदेशी ब्यूरो बंद कर दिए गए हैं।

  • मेट्रो डेस्क और कॉपी एडिटिंग टीम में भी कटौती की गई है।

  • नई दिल्ली ब्यूरो और मिडिल ईस्ट की रिपोर्टिंग टीम भी प्रभावित हुई है।

बताया जा रहा है कि लगभग एक-तिहाई स्टाफ इस निर्णय से प्रभावित हुए  हैं।

ईशान थरूर की भी गई नौकरी

इस छंटनी में वरिष्ठ पत्रकार ईशान थरूर का नाम भी शामिल है, जो कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे हैं। ईशान थरूर वॉशिंगटन पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लिखते थे और ‘WorldView’ कॉलम के लिए जाने जाते थे।

उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी विदाई की पुष्टि करते हुए लिखा कि उन्हें और इंटरनेशनल टीम के कई प्रतिभाशाली पत्रकारों को एक साथ निकाला गया है। उन्होंने अपने न्यूज़रूम और दुनियाभर में काम कर रहे सहयोगियों के लिए दुख जताया। एक पोस्ट में उन्होंने खाली पड़े न्यूज़रूम की तस्वीर साझा करते हुए इसे “बेहद बुरा दिन” बताया।

ईशान ने 2017 में शुरू किए गए अपने WorldView कॉलम को अपने करियर का सम्मानजनक अध्याय बताया और करीब 5 लाख पाठकों का आभार व्यक्त किया।

प्रबंधन ने क्या कहा?

अखबार के कार्यकारी संपादक मैट मरे ने इस फैसले को “दर्दनाक लेकिन जरूरी” बताया। उनके अनुसार, बदलती तकनीक, डिजिटल ट्रेंड और पाठकों की बदलती आदतों के चलते ये कदम उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब अखबार के लिए हर विषय को कवर करना संभव नहीं है।

फैसले की आलोचना

इस निर्णय की कड़ी आलोचना भी हो रही है। वॉशिंगटन पोस्ट के पूर्व संपादक मार्टिन बैरन ने इसे अखबार की साख को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया। कई मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अखबार की वैश्विक पहचान और विश्वसनीयता पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।

वैश्विक मीडिया पर आर्थिक दबाव

ये छंटनी केवल एक संस्थान तक सीमित घटना नहीं मानी जा रही है। इसे वैश्विक मीडिया उद्योग में बढ़ते आर्थिक दबाव, डिजिटल ट्रांजिशन और विज्ञापन राजस्व में गिरावट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

वॉशिंगटन पोस्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इतने बड़े स्तर पर हुई कटौती ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी है और पत्रकारिता के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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