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राज्यसभा में पीएम मोदी का विपक्ष पर प्रहार, ‘मोहब्बत की दुकान’ से ‘ट्रेड डील’ तक का सफर

PM Modi

राज्यसभा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। लगभग 1 घंटे 38 मिनट के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने जहाँ एक ओर सरकार की उपलब्धियों को गिनाया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की राजनीति और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

‘मोहब्बत की दुकान’ पर तीखा तंज
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के ‘मोहब्बत की दुकान’ के नारे को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि एक तरफ प्यार की बातें की जा रही हैं, तो दूसरी तरफ ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ जैसे डरावने नारे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने पूछा:

  • विरोधाभास: “ये कौन सी मोहब्बत की दुकान है, जो देश के ही नागरिक की कब्र खोदने की बात कर रही है?”
  • संस्कारों पर सवाल: पीएम ने इसे मानवता का अपमान बताते हुए विपक्षी नेताओं के संस्कारों पर भी सवाल उठाए।
  • विकास बनाम विनाश: उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार युवाओं के भविष्य के लिए जमीन तैयार कर रही है, जबकि विपक्ष कब्र खोदने के “कार्यक्रम” में व्यस्त है।

बोफोर्स डील से ट्रेड डील तक का बदलाव
भ्रष्टाचार और नीतिगत पंगुता के पुराने दौर को याद दिलाते हुए पीएम मोदी ने टीएमसी, डीएमके और कांग्रेस को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पहले के समय में जब ‘डील’ की बात होती थी, तो केवल बोफोर्स घोटाले की याद आती थी। लेकिन आज भारत का परिदृश्य बदल चुका है।

हम देश को बोफोर्स डील के काले साये से निकालकर आधुनिक ‘ट्रेड डील’ के गौरवशाली दौर तक ले आए हैं।”सदन में इस दौरान काफी हंगामा भी देखने को मिला। प्रधानमंत्री के भाषण के बीच विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया।

बड़ी कूटनीतिक जीत: खाड़ी देशों (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौता
भाषण के इतर, भारत के आर्थिक मोर्चे से भी एक बड़ी खबर आई। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने पुष्टि की कि भारत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के 6 देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत शुरू करने की शर्तों पर सहमति बन गई है।

मुख्य बिंदु:

  • शामिल देश: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: इससे पहले 2006 और 2008 में भी वार्ता के प्रयास हुए थे, लेकिन वे तीसरे दौर से आगे नहीं बढ़ पाए थे।
  • महत्व: यह समझौता भारत के व्यापारिक रिश्तों को खाड़ी देशों के साथ नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

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