महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भाईंदर इलाके में पिछले वर्ष नागरिकों पर हमले के बाद सुर्खियों में आया 4 वर्षीय नर तेंदुआ मृत पाया गया है। ये तेंदुआ दिसंबर में रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद येऊर वनक्षेत्र में छोड़ा गया था। अब नागला क्षेत्र में उसका शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। फिलहाल मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है।
भाईंदर में हमले के बाद पकड़ा गया था तेंदुआ
19 दिसंबर की सुबह भाईंदर पूर्व के तलाव रोड क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी से इलाके में दहशत फैल गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेंदुआ एक इमारत में घुस गया था और इस दौरान उसने सात लोगों पर हमला कर दिया। हमले में कई नागरिक घायल हुए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई थीं।
घटना के बाद वन विभाग की टीम ने व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया। करीब सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि तेंदुआ इमारत के भीतर था और उसे बिना किसी अतिरिक्त नुकसान के काबू में करना जरूरी था।
मेडिकल जांच के बाद येऊर जंगल में छोड़ा गया
पकड़े जाने के बाद तेंदुए की स्वास्थ्य जांच की गई और उसे उसके प्राकृतिक आवास माने जाने वाले येऊर जंगल में छोड़ दिया गया। उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए वन विभाग ने उसके गले में सैटेलाइट कॉलर भी लगाया था, ताकि लोकेशन और स्वास्थ्य संबंधी संकेतों पर नजर रखी जा सके।
सैटेलाइट कॉलर से मिला अलर्ट
हाल ही में सैटेलाइट कॉलर के माध्यम से वन विभाग को संकेत मिला कि तेंदुआ लंबे समय से एक ही स्थान पर स्थिर है। ये असामान्य गतिविधि थी, जिसके बाद टीम तत्काल मौके पर पहुंची। जांच के दौरान नागला क्षेत्र में तेंदुए का शव बरामद हुआ।
वन विभाग ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
मौत के कारणों पर कई संभावनाएं
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, तेंदुए की मौत के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। संभावना है कि वो किसी अन्य जंगली जानवर से संघर्ष में घायल हुआ हो। बीमारी या आंतरिक संक्रमण भी एक कारण हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ ये भी मानते हैं कि पकड़ने और नए स्थान पर छोड़े जाने का तनाव उसके स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
हालांकि, वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
वन विभाग की सतर्कता
ये घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष के बढ़ते मामलों की ओर भी संकेत करती है। शहरी क्षेत्रों के नजदीक वन्यजीवों की आवाजाही और उसके बाद होने वाली घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अब सभी की नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिससे ये स्पष्ट हो सकेगा कि भाईंदर में दहशत फैलाने वाले इस तेंदुए की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
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