महाराष्ट्र के सोलापुर से एक दुखद खबर सामने आई है। शहर की प्रसिद्ध मुलतानी बेकरी के मालिक सुनील मोतीलाल सदारंगानी ने एक बहुमंजिला इमारत की 17वीं मंजिल से छलांग लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली। घटना के बाद स्थानीय व्यापारिक समुदाय और शहरवासियों में शोक और स्तब्धता का माहौल है।
घटना कैसे हुई?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, व्यवसायी एक इमारत की ऊपरी मंजिल पर पहुंचे थे। ये घटना गुरुवार दोपहर करीब 4 बजे की है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि छलांग लगाने से पहले उन्होंने हाथ जोड़कर नीचे मौजूद लोगों की ओर देखा। इसके बाद उन्होंने 17वीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्हें 17 मंजिर पर संदिग्ध तरीके से घूमते हुए देखा गया था। वहां मौजूद लोगों ने घूमते वक्त उनका वडियो भी बनाया था। यहां तक कि लोगों ने अपार्टमेंट के वॉचमैन को इसकी जानकारी भी दी थी, जिसके बाद एक कर्मचारी उनके पास गया भी और उनसे बात करके उन्हें नीचे भी लाया। लेकिन 1वीं मंजिल पर आने के बाद सदारंगानी ने कर्मचारी से कहा कि, उनके गाड़ी की चाबी खो गई है।
इसके बाद फिर वो भागते हुए 17वीं मंजिल पर चले गए। हालांकि उनके पीछे एक आदमी भागता हुआ आया, लेकिन तब तक वो ऊपर से कूद गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और आपातकालीन सेवाएं मौके पर पहुंचीं। घायल अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शहर में जानी-मानी पहचान
मुलतानी बेकरी सोलापुर की जानी-मानी और पुरानी बेकरी में गिनी जाती है। स्थानीय स्तर पर इस प्रतिष्ठान की मजबूत पहचान रही है और बड़ी संख्या में ग्राहक इससे जुड़े रहे हैं। व्यवसायी का शहर के व्यापारिक जगत में भी प्रभाव माना जाता था।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पिछले कुछ दिनों से उनके मानसिक दबाव में होने की बात सामने आ रही है, लेकिन फिलहाल आत्महत्या के कारणों की वजह का कुछ पता नहीं चल पाया है। घटनास्थल का पंचनामा किया गया है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना की पृष्ठभूमि स्पष्ट हो सके।
मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और कारोबारी दबाव जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव, आर्थिक दबाव या व्यक्तिगत कारण कई बार लोगों को गंभीर कदम उठाने की ओर धकेल सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहा है, तो समय पर परामर्श और सहयोग बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में परिवार और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
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