बॉलीवुड एक्टर और कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल में सरेंडर किया, जब दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उनकी सजा से जुड़ी समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। सरेंडर से पहले राजपाल यादव भावुक नजर आए और उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति और अकेलेपन को लेकर बयान दिया।
“मेरे पास पैसे नहीं हैं…” – भावुक हुए राजपाल यादव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जेल में सरेंडर करने से पहले राजपाल यादव ने कहा, “सर, क्या करूं? मेरे पास पैसे नहीं हैं। और कोई उपाय नहीं दिखता। यहां हम सब अकेले हैं। कोई दोस्त नहीं है। मुझे इस संकट से अकेले ही निपटना होगा।”
उनके इस बयान से यह साफ झलकता है कि लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई ने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित किया है।
क्या है पूरा मामला?
ये मामला वर्ष 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए एक कंपनी से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी, जिसके कारण कर्ज चुकाने में दिक्कतें आईं। समय पर भुगतान न हो पाने से कई चेक बाउंस हो गए। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।
2018 में हुई थी सजा
अप्रैल 2018 में एक मजिस्ट्रेट अदालत ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया और छह महीने की सजा सुनाई। हालांकि उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान बकाया राशि और ब्याज बढ़ता गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल देनदारी अब बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
इंडस्ट्री से नहीं मिला समर्थन?
एक इंटरव्यू में जब राजपाल यादव के मैनेजर से पूछा गया कि क्या फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें इस मुश्किल समय में कोई समर्थन मिला है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगता। इस बयान से ये संकेत मिलता है कि वो इस कानूनी संकट में लगभग अकेले ही जूझ रहे हैं।
वर्क फ्रंट पर सक्रिय
कानूनी परेशानियों के बावजूद राजपाल यादव फिल्मी दुनिया में सक्रिय हैं। उन्हें हाल ही में ‘बेबी जॉन’ और ‘इंटरोगेशन’ जैसी फिल्मों में देखा गया था। आने वाले समय में वे अक्षय कुमार के साथ हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘भूत बांग्ला’ में नजर आएंगे, जो 10 अप्रैल को रिलीज होने वाली है।
राजपाल यादव का ये मामला बताता है कि फिल्मी दुनिया में सफलता और असफलता के बीच का अंतर कितना बड़ा हो सकता है। एक फिल्म की असफलता से शुरू हुआ आर्थिक संकट अब वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई में बदल चुका है।
तिहाड़ जेल में उनका सरेंडर इस लंबे विवाद का एक नया अध्याय है। आने वाले समय में अदालत की प्रक्रिया और कानूनी फैसले से ही ये स्पष्ट होगा कि आगे की स्थिति क्या होगी।
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