डिजिटल इंडिया: डिजिटल दुनिया में बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग और भ्रामक ‘डीपफेक’ वीडियो पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में किए गए हालिया संशोधनों के साथ, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तकनीक का इस्तेमाल तरक्की के लिए होना चाहिए, न कि अराजकता फैलाने के लिए।
3 घंटे में हटाना होगा कंटेंट: सख्त हुई समय सीमा
नए नियमों के तहत, सरकार या अदालत का निर्देश मिलने के महज 3 घंटे के भीतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाना अनिवार्य होगा।
- यह नियम विशेष रूप से उन मामलों में लागू होगा जो गंभीर और तात्कालिक जोखिम पैदा करते हैं।
- सामान्य मामलों की तुलना में यह टाइमलाइन बहुत छोटी है, जो सरकार की जीरो-टोलरेंस नीति को दर्शाती है।
एआई कंटेंट की होगी स्पष्ट पहचान (Labelling)
अब ‘सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन’ (SGI) को छिपाना नामुमकिन होगा। सरकार ने दोहरे सुरक्षा चक्र का प्रावधान किया है:
- प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी: एआई टूल्स से तैयार हर कंटेंट पर स्पष्ट ‘लेबल’ लगा होना चाहिए ताकि यूजर जान सकें कि यह असली नहीं है।
- यूजर की घोषणा: कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को खुद यह बताना होगा कि क्या इसे एआई द्वारा बनाया या बदला गया है।
- ऑटोमेटेड टूल्स: प्लेटफॉर्म्स को ऐसे वीडियो की पहचान के लिए ऑटोमेटेड टूल्स विकसित करने होंगे।
20 फरवरी से लागू: ‘सेफ हार्बर’ के लिए नियम मानना जरूरी
ये नियम 20 फरवरी से प्रभावी होंगे। यदि कोई सोशल मीडिया कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो वह आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbor Protection) खो देगी। इसका सीधा मतलब है कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी अवैध कंटेंट के लिए कंपनी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा और उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकेगी।
क्यों पड़ी इन नियमों की जरूरत?
हाल के महीनों में डीपफेक के जरिए वित्तीय धोखाधड़ी, सेलिब्रिटी वीडियो के दुरुपयोग और चुनाव के दौरान गलत सूचनाएं फैलाने के खतरे तेजी से बढ़े हैं। ये नए संशोधन भारत के डिजिटल गवर्नेंस ढांचे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रहार हैं।
सरकार का यह कदम डिजिटल नागरिकों की सुरक्षा और इंटरनेट की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। अब एआई का जादू तो चलेगा, लेकिन पारदर्शिता के साथ।






























