Solar Eclipse 2026: खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए बड़ी खबर है। साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी को होने जा रहा है। ये एक वलयाकार सूर्यग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसके दौरान आसमान में अद्भुत ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी आग के छल्ले जैसा दृश्य दिखाई देगा। दुनिया भर के वैज्ञानिक और स्पेस एजेंसियां इस दुर्लभ खगोलीय घटना पर नजर बनाए हुए हैं।
17 फरवरी को होगा साल का पहला सूर्यग्रहण
इस दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरेगा, जिससे सूर्य का बड़ा हिस्सा ढंक जाएगा। हालांकि ये पूर्ण सूर्यग्रहण नहीं होगा, बल्कि वलयाकार ग्रहण होगा।
क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’ इफेक्ट?
वलयाकार सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी कक्षा के सबसे दूर वाले बिंदु (अपोजी) पर होता है। इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढंक नहीं पाता। परिणामस्वरूप सूर्य की बाहरी परत एक चमकदार आग के छल्ले की तरह दिखाई देती है, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
ग्रहण की अवधि कितनी होगी?
रिपोर्ट्स के अनुसार, रिंग ऑफ फायर का प्रभाव सुबह लगभग 7 बजकर 12 मिनट (अमेरिकी समयानुसार) से शुरू होगा और करीब 1 मिनट 52 सेकंड तक रहेगा। इसके बाद चंद्रमा की छाया धीरे-धीरे सूर्य की डिस्क से हटने लगेगी।
कहां-कहां दिखाई देगा ये सूर्यग्रहण?
इस ग्रहण का मुख्य मार्ग अंटार्कटिका से होकर गुजरेगा। इसलिए ‘रिंग ऑफ फायर’ का पूरा नजारा वहीं देखा जा सकेगा। अंटार्कटिका में मानव आबादी बेहद सीमित है, इसलिए इसे देखने वाले लोग भी बहुत कम होंगे। ग्रहण के रास्ते में केवल दो रिसर्च स्टेशन स्थित हैं, जहां वैज्ञानिक मौजूद रहते हैं।
इसके अलावा दक्षिणी अमेरिका के दक्षिणी छोर, दक्षिण अफ्रीका और प्रशांत, अटलांटिक तथा हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्यग्रहण दिखाई देगा।
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्यग्रहण?
ये वलयाकार सूर्यग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि इसका मुख्य मार्ग अंटार्कटिका के ऊपर से गुजर रहा है।
सूर्यग्रहण क्या होता है?
सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढंक लेता है।
एक रोचक तथ्य ये है कि सूर्य चंद्रमा से लगभग 400 गुना बड़ा है, लेकिन वो पृथ्वी से लगभग 400 गुना अधिक दूर भी है। इसी कारण दोनों आकाश में लगभग एक समान आकार के दिखाई देते हैं। जब चंद्रमा सूर्य के सामने सटीक स्थिति में आ जाता है, तब सूर्यग्रहण की घटना होती है।
17 फरवरी को होने वाला ये वलयाकार सूर्यग्रहण खगोल विज्ञान के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है। ‘रिंग ऑफ फायर’ का दृश्य भले ही सीमित क्षेत्रों में दिखाई देगा, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए ये अध्ययन का महत्वपूर्ण अवसर है। ये साल 2026 की पहली बड़ी खगोलीय घटना होगी, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
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