Ajit Pawar Plane Crash: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों बारामती में हुए पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे को लेकर घमासान मचा हुआ है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सत्तापक्ष और विपक्ष के दावों ने इस हादसे को एक रहस्यमयी मोड़ दे दिया है। अब इस मामले में ‘एक जरूरी फाइल’ और ‘सैकड़ों करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट’ की एंट्री हुई है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
प्रमोद हिंदुराव का बड़ा खुलासा: वो एक ‘फोन कॉल’ जिसने बदल दिया प्लान
राकांपा (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता प्रमोद हिंदुराव ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, अजित पवार का उस दिन का यात्रा कार्यक्रम अचानक एक फोन आने के बाद बदला गया था।
- सड़क मार्ग की तैयारी: अजित पवार ने अपनी यात्रा के लिए गाड़ी में सामान तक रखवा दिया था और वे सड़क मार्ग से निकलने ही वाले थे।
- मंत्रालय की वो फाइल: हिंदुराव का दावा है कि तभी किसी वरिष्ठ नेता (संभवतः प्रफुल्ल पटेल या कोई अन्य) का फोन आया। फोन पर मंत्रालय की एक अत्यंत महत्वपूर्ण फाइल पर हस्ताक्षर करने का जिक्र था।
- देरी का कारण: अधिकारियों से हुई बातचीत के हवाले से हिंदुराव ने बताया कि उस फाइल के काम को निपटाते-निपटाते रात के 8 बज गए। इसी कारण उन्होंने सड़क मार्ग का इरादा त्यागा, गाड़ी से बैग उतरवाए और अगले दिन सुबह चार्टर्ड फ्लाइट से जाने का निर्णय लिया।
रोहित पवार के गंभीर आरोप: ‘नरेश अरोड़ा’ और कॉन्ट्रैक्ट का विवाद
दूसरी ओर, राकांपा (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने इस मामले में भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति का एंगल जोड़ दिया है। उन्होंने लगातार तीसरे दिन हमला बोलते हुए कुछ गंभीर सवाल खड़े किए:
- ₹100 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट: रोहित पवार का दावा है कि 27 तारीख को एक राजनीतिक कंसल्टेंट नरेश अरोड़ा के सैकड़ों करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करने पर चर्चा चल रही थी।
- नेताओं का दबाव: आरोप है कि कुछ वरिष्ठ नेता चाहते थे कि यह कॉन्ट्रैक्ट जारी रहे और उसका भुगतान किया जाए। इसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिससे अजित पवार के निकलने में देरी हुई।
- बारामती की वो ‘फटकार’: रोहित ने यह भी दावा किया कि अजित पवार ने बारामती में नरेश अरोड़ा से जुड़े लोगों को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे घटनाक्रम में बड़े नेताओं की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए।
विरोधाभासों का जाल: क्या छुपाया जा रहा है?
इन दोनों बयानों को देखें तो एक बात साफ है कि उस दिन अजित पवार के कार्यक्रम में हुए बदलाव के पीछे सिर्फ “व्यस्तता” नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन से जुड़ी कुछ बड़ी गतिविधियां थीं।
पक्ष मुख्य दावा मुख्य बिंदु
| नाम | गुट / पक्ष | मुद्दा / कारण | विवरण |
|---|---|---|---|
| प्रमोद हिंदुराव | अजित गुट | प्रशासनिक देरी | प्रशासनिक कार्य मंत्रालय की फाइल पर हस्ताक्षर के कारण देरी हुई। |
| रोहित पवार | शरद गुट | राजनीतिक विवाद | चुनावी कंसल्टेंट के कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान को लेकर तनातनी थी। |
जांच की बढ़ती मांग
विमान हादसा तकनीकी खराबी था या किसी तनावपूर्ण स्थिति का परिणाम, यह तो आधिकारिक जांच के बाद ही साफ होगा। लेकिन जिस तरह से ‘फाइल’ और ‘करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट’ की बातें सामने आ रही हैं, उसने जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ चुनावी व्यस्तता थी, या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा था?































