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IT सेक्टर पर ‘AI’ का ग्रहण: 10 महीने के निचले स्तर पर इंडेक्स; क्या खत्म हो रहा है सॉफ्टवेयर इंजीनियरों का दबदबा?

IT सेक्टर
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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ, खासकर आईटी सेक्टर के लिए। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट तो दर्ज की गई, लेकिन सबसे ज्यादा गाज गिरी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कंपनियों पर। बीएसई आईटी इंडेक्स 5% तक लुढ़ककर पिछले 10 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह गिरावट केवल एक दिन की सुस्ती नहीं है, बल्कि एक गहरे संरचनात्मक संकट की ओर इशारा कर रही है।

बाजार का गणित: आंकड़ों में गिरावट की भयावहता
शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए:

  • सेंसेक्स (Sensex): 559 अंक गिरकर 83,675 पर बंद।
  • निफ्टी (Nifty): 145 अंक टूटकर 25,807 पर पहुंचा।
  • आईटी इंडेक्स की मार: जहां बाजार में मामूली गिरावट थी, वहीं आईटी इंडेक्स 5% टूट गया।
  • लगातार गिरावट: साल 2025 में आईटी इंडेक्स 12.6% गिरा था और 2026 की शुरुआत से अब तक यह 11% और टूट चुका है।

गिरावट की असली वजह: ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) का खौफ
आईटी शेयरों में इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण एआई (AI) को माना जा रहा है। निवेशकों के मन में यह डर बैठ गया है कि एआई अब भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल को ध्वस्त कर सकता है।

  • इंजीनियरों की जगह AI: आशंका जताई जा रही है कि एआई अब भारत के आईटी सर्विसेज सेक्टर में उन कामों को संभाल लेगा जो पहले हजारों इंजीनियर करते थे।
  • बिलेबल आवर्स (Billable Hours) में कटौती: भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई मुख्य रूप से कर्मचारियों द्वारा काम किए गए घंटों पर आधारित होती है। एआई के आने से काम जल्दी होगा, जिससे ‘बिलेबल घंटे’ कम होंगे और कंपनियों का राजस्व (Revenue) घटेगा।
  • छंटनी का डर: कर्मचारियों की संख्या में संभावित कटौती की खबरों ने टेक सेंटीमेंट को कमजोर कर दिया है।

वैश्विक कारण: खर्चों में कटौती और कमजोर सेंटीमेंट
केवल घरेलू मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय आईटी कंपनियों के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल बनी हुई हैं:

  • ग्लोबल क्लाइंट्स की बेरुखी: वैश्विक बाजारों में मंदी की आशंका के चलते बड़ी विदेशी कंपनियों ने अपने टेक बजट में भारी कटौती की है।
  • भविष्य की अनिश्चितता: निवेशक अब उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं जो एआई के साथ तेजी से तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं।

क्या यह बदलाव का समय है?
आईटी सेक्टर पर बढ़ता दबाव यह संकेत दे रहा है कि अब केवल ‘सॉफ्टवेयर सर्विसेज’ के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय दिग्गज कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी और खुद को एआई-संचालित समाधानों (AI-driven solutions) के अनुरूप ढालना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह गिरावट आने वाले समय में और भी गहरी हो सकती है।
आईटी सेक्टर की गिरावट का तुलनात्मक चार्ट:

वर्ष इंडेक्स में गिरावट प्रमुख कारण
2025 12.6% वैश्विक मंदी और क्लाइंट्स की कटौती
2026 (अब तक) 11.0% एआई (AI) का गंभीर असर और बिलेबल आवर्स में कमी

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