अगर आप रोजाना जिम जा रहे हैं, कड़ी मेहनत कर रहे हैं और पसीना भी खूब बहा रहे हैं, फिर भी वजन कम नहीं हो रहा, तो इसे सामान्य स्थिति मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मेटाबॉलिक रेजिस्टेंस एक अहम कारण हो सकता है।
सीनियर डॉक्टर बताते हैं कि ये ऐसी अवस्था है, जिसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और कैलोरी बर्न होने की रफ्तार कम हो जाती है। यानी शरीर उतनी ऊर्जा खर्च नहीं कर पाता, जितनी सामान्य रूप से करनी चाहिए। इसका सीधा असर वजन घटाने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
क्या है मेटाबॉलिक रेजिस्टेंस?
मेटाबॉलिज्म वो प्रक्रिया है, जिसके जरिए शरीर भोजन को ऊर्जा में बदलता है। जब ये प्रक्रिया धीमी हो जाती है, तो शरीर कम कैलोरी खर्च करता है और फैट जमा होने लगता है। ऐसे में नियमित वर्कआउट और डाइटिंग के बावजूद वजन कम नहीं होता।
ये स्थिति अक्सर उन लोगों में देखी जाती है, जो लंबे समय से वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे।
मेटाबॉलिक रेजिस्टेंस के सामान्य संकेत
इस स्थिति के कुछ सामान्य लक्षण हो सकते हैं, जैसे लंबे समय तक वजन का स्थिर रहना, पेट के आसपास चर्बी जमा होना, हर समय थकान महसूस होना और वर्कआउट के बाद भी सुस्ती बनी रहना। कुछ लोगों को मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है।
सुबह उठते ही भारीपन महसूस होना, दिनभर ऊर्जा की कमी रहना, थोड़ी मेहनत के बाद जल्दी थक जाना और पूरी नींद लेने के बावजूद तरोताजा महसूस न करना भी इसके संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
मेटाबॉलिक रेजिस्टेंस के प्रमुख कारण
डॉ. माने के अनुसार, असंतुलित खानपान इस समस्या का बड़ा कारण है। ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन शरीर की इंसुलिन प्रतिक्रिया को प्रभावित करता है।
नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है, जिससे शरीर फैट को ऊर्जा में बदलने में पीछे रह जाता है। लगातार तनाव में रहने से हार्मोनल असंतुलन होता है, जो वजन घटाने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
बहुत कम कैलोरी वाली डाइट लंबे समय तक लेने से शरीर “सेविंग मोड” में चला जाता है, जिससे कैलोरी खर्च कम हो जाती है। इसके अलावा थायरॉइड जैसी हार्मोनल समस्याएं भी मेटाबॉलिक रेट को प्रभावित कर सकती हैं।
किन लोगों को अधिक खतरा?
बैठकर काम करने वाली जीवनशैली अपनाने वालों में इसका जोखिम ज्यादा होता है। जिनके परिवार में डायबिटीज या मोटापे का इतिहास है, उनमें भी संभावना बढ़ जाती है।
अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और लंबे समय से बढ़ा हुआ वजन भी जोखिम कारक हैं। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के दौरान ये समस्या अधिक देखने को मिल सकती है।
बचाव और समाधान
मेटाबॉलिक रेजिस्टेंस से बचने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना बेहद जरूरी है। भोजन में प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट को शामिल करें। नियमित कार्डियो एक्सरसाइज के साथ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इससे मसल्स बढ़ती हैं और मेटाबॉलिज्म तेज होता है।
पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग या मेडिटेशन अपनाएं। क्रैश डाइट से बचें और धीरे-धीरे, स्वस्थ तरीके से वजन कम करने का लक्ष्य रखें। नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहना भी फायदेमंद होता है, ताकि किसी हार्मोनल असंतुलन का समय रहते पता चल सके।
अगर आप लगातार प्रयास के बावजूद वजन कम नहीं कर पा रहे हैं, तो इसे सिर्फ मेहनत की कमी न समझें। सही कारण पहचानकर विशेषज्ञ की सलाह लें और संतुलित जीवनशैली अपनाएं। यही स्वस्थ और स्थायी वजन घटाने का सही रास्ता है।
ये भी पढ़ें: घर पर मनाएं सबसे रोमांटिक वेलेंटाइन डे: 5 शानदार आइडिया जो बना देंगे दिन को यादगार






























