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NCP विलय पर सियासी भूचाल: बड़े नेता ने किया दावा – ‘पूरी कमान अजित दादा को सौंपने का था प्लान’

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महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संभावित विलय को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष Shashikant Shinde ने अपने अध्यक्षीय लेख में बड़ा दावा करते हुए कहा है कि यदि विलय होता, तो पार्टी का पूरा नेतृत्व Ajit Pawar को सौंपने का निर्णय पहले से तय था।

इस बयान के बाद राज्य की सियासत में हलचल और बढ़ गई है, क्योंकि अब तक विलय को लेकर आधिकारिक तौर पर स्पष्ट रुख सामने नहीं आया था।

‘नेतृत्व अजित दादा को सौंपने का निर्णय हमारा था’

शशिकांत शिंदे ने अपने लेख में लिखा कि पार्टी के भीतर ये सहमति बन चुकी थी कि विलय के बाद संगठन की कमान पूरी तरह अजित पवार को दी जाएगी। उनके अनुसार ये फैसला सोच-समझकर लिया गया था, ताकि पार्टी एकजुट होकर आगे बढ़ सके और राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।

उन्होंने ये भी उल्लेख किया कि अजित पवार का सपना अधूरा रह गया, जिसे पूरा करना पार्टी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है। इस बयान को विलय को लेकर पहले से चल रही आंतरिक बातचीत का संकेत माना जा रहा है।

शरद पवार के बयान से बढ़ी थी चर्चा

इससे पहले Sharad Pawar ने भी 12 फरवरी को दिए एक बयान में संकेत दिया था कि उसी दिन विलय पर फैसला होने वाला था। उनके इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई थीं।

सांसद Supriya Sule भी इस मुद्दे पर बोलते हुए भावुक नजर आई थीं, जिससे ये स्पष्ट हुआ कि पार्टी के भीतर हालात संवेदनशील रहे हैं।

रोहित पवार का दावा और दूसरी ओर से चुनौती

विधायक Rohit Pawar ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि उनके पास विलय से जुड़े प्रमाण हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि अजित पवार के निधन के कारण वे संयम बरत रहे हैं।

दूसरी ओर, Praful Patel और Sunil Tatkare जैसे नेताओं ने इन दावों को लेकर खुली चुनौती दी थी। इससे स्पष्ट है कि दोनों गुटों के बीच मतभेद अब भी कायम हैं।

क्या सच में तैयार थी विलय की जमीन?

शशिकांत शिंदे के ताजा बयान ने इस बहस को फिर से हवा दे दी है कि क्या वास्तव में विलय की जमीन पहले से तैयार थी या ये सिर्फ सियासी बयानबाजी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार आ रहे बयानों से ये संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर गंभीर स्तर पर चर्चा जरूर हुई थी। हालांकि अब तक किसी औपचारिक घोषणा का अभाव इस मुद्दे को और जटिल बना रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों के बीच खींचतान खत्म होती नजर नहीं आ रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयान सामने आ सकते हैं, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में नई दिशा तय हो सकती है।

राज्य की सियासत में NCP का ये आंतरिक समीकरण फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

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