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महाराष्ट्र की सियासत में ‘महा-मंथन’: क्या फिर एक होंगे दोनों NCP? सुनेत्रा पवार की ‘वन-टू-वन’ मीटिंग से मची खलबली

NCP विलय विवाद
NCP विलय विवाद

महाराष्ट्र: महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पवार’ नाम का सस्पेंस खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों—अजित पवार और शरद पवार—के विलय की चर्चाएं गलियारों में तैर रही हैं। इसी बीच, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुँचा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार अब अपनी पार्टी के हर एक विधायक के साथ ‘वन-टू-वन’ बैठक करने जा रही हैं। यह महज एक मुलाकात नहीं, बल्कि पार्टी के अस्तित्व और भविष्य की दिशा तय करने वाला ‘शक्ति परीक्षण’ माना जा रहा है।

विधायकों के मन की बात: क्या चाहते हैं माननीय?
अगले सप्ताह से शुरू होने वाला यह बैठकों का दौर बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण होगा। सुनेत्रा पवार प्रत्येक विधायक से अकेले में चर्चा करेंगी ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी राय रख सकें। इस चर्चा के मुख्य बिंदु होंगे:

  • क्या विधायक शरद पवार गुट के साथ विलय के पक्ष में हैं?
  • मौजूदा राजनीतिक हालात में गठबंधन (महायुति) के साथ रहने के क्या फायदे-नुकसान हैं?
  • जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मूड क्या है?

दावों और प्रतिदावों का चक्रव्यूह
इस पूरे विवाद की जड़ शरद पवार का वह बयान है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि दोनों गुटों के विलय की बात काफी आगे बढ़ चुकी है और इसकी घोषणा खुद अजित पवार करने वाले थे। हालांकि, सत्ता के गलियारों में इसे सिरे से खारिज किया जा रहा है:

  • देवेंद्र फडणवीस और अजित गुट के दिग्गज नेता प्रफुल्ल पटेल व छगन भुजबल ने इन दावों को कोरी अफवाह बताया है।
  • लेकिन सुनेत्रा पवार की इन बैठकों ने संकेत दिया है कि पर्दे के पीछे कुछ तो पक रहा है, जिसे सुलझाने की जिम्मेदारी अब परिवार के भीतर से ही शुरू हुई है।

राजनीतिक मायने: क्यों अहम है सुनेत्रा पवार की भूमिका?

पक्षसंभावित प्रभाव
पार्टी की एकजुटताविधायकों की व्यक्तिगत राय जानने से पार्टी में किसी भी संभावित बगावत को रोका जा सकेगा और आंतरिक स्थिति मजबूत होगी।
अजित पवार का स्टैंडसुनेत्रा पवार की रिपोर्ट के आधार पर अजित पवार भविष्य में शरद पवार या महायुति के साथ अपने रिश्तों पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं।
विपक्ष की रणनीतिअगर विलय होता है, तो महाविकास अघाड़ी (MVA) की ताकत कई गुना बढ़ सकती है, जो आगामी चुनावों में निर्णायक साबित होगी।

दूरियां घटेंगी या टकराव बढ़ेगा?
सुनेत्रा पवार की यह कवायद पूरी होने के बाद वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर विस्तृत रिपोर्ट साझा करेंगी। महाराष्ट्र की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजरें अब अगले सप्ताह पर टिकी हैं। क्या यह ‘घर वापसी’ की तैयारी है या फिर अपने कुनबे को एकजुट रखने की एक सोची-समझी चाल? इसका जवाब सुनेत्रा पवार की डायरी में दर्ज होने वाली विधायकों की राय में छिपा है।

राजनीति में दरवाजे कभी पूरी तरह बंद नहीं होते, और पवार परिवार की राजनीति में तो खिड़कियां भी संभावनाओं के लिए खुली रहती हैं।

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