बांग्लादेश: बांग्लादेश की राजनीति में बीते साढ़े तीन दशक से जारी ‘दो बेगमों’ (खालिदा जिया और शेख हसीना) की प्रतिद्वंद्विता का अध्याय अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान पर अपना भरोसा जताया है। शुक्रवार को आए नतीजों में BNP ने 299 में से 212 सीटों पर प्रचंड बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया।
सत्ता का नया समीकरण: जमात-ए-इस्लामी पिछड़ी
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला पहलू कट्टरपंथी खेमे की हार रही। जमात-ए-इस्लामी, जिसे एक बड़ी चुनौती माना जा रहा था, मात्र 77 सीटों पर सिमट कर रह गई। यह परिणाम स्पष्ट करता है कि बांग्लादेशी मतदाताओं ने कट्टरपंथ के बजाय BNP के नेतृत्व और स्थिरता को प्राथमिकता दी है।
35 साल का लंबा इंतजार
1990 में काजी जफर अहमद के बाद तारिक रहमान बांग्लादेश के पहले निर्वाचित पुरुष प्रधानमंत्री होंगे। 1991 से लेकर 2024 तक, देश की सत्ता की धुरी कभी शेख हसीना तो कभी खालिदा जिया के इर्द-गिर्द घूमती रही। अब 20 साल बाद BNP की सत्ता में वापसी ने न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया है, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति के समीकरण भी बदल दिए हैं।
तारिक रहमान की जीत के मुख्य बिंदु
- जनता को समर्पण: जीत के बाद अपने पहले संबोधन में तारिक रहमान ने इस सफलता को ‘जनता की जीत’ बताया। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की बहाली का नया सवेरा है।
- ऐतिहासिक विरासत: तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व पीएम खालिदा जिया के पुत्र हैं। 2006 में उनकी मां के सत्ता से हटने के बाद, यह रहमान के लिए निजी और राजनीतिक पुनर्वास जैसा है।
- शपथ ग्रहण समारोह: अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने पुष्टि की है कि तारिक रहमान 16 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे।
चुनौतियां और भविष्य की राह
भले ही बहुमत ‘दमदार’ है, लेकिन रहमान के सामने चुनौतियों का पहाड़ है:
- अर्थव्यवस्था को संभालना: बढ़ती महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को सुधारना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
- भारत के साथ संबंध: शेख हसीना के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध काफी मजबूत थे। अब रहमान को यह साबित करना होगा कि उनकी सरकार पड़ोसियों के साथ कैसा संतुलन बनाती है।
- कानून-व्यवस्था: राजनीतिक संक्रमण के इस दौर में देश के भीतर स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
यह केवल एक चुनावी जीत नहीं है, बल्कि बांग्लादेश के आम नागरिक की उस आवाज की जीत है जो वर्षों से लोकतंत्र की वापसी का इंतजार कर रही थी।”
तारिक रहमान, जीत के बाद
बांग्लादेश अब एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है। 16 फरवरी को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह केवल एक व्यक्ति का राज्याभिषेक नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक दिशा का नया निर्धारण होगा।































