Epstein Files: अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी गोपनीय फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद मचे वैश्विक हड़कंप की आंच अब भारत के लोकतंत्र के मंदिर ‘संसद’ तक पहुँच गई है। शुक्रवार को लोकसभा में उस समय अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जब विपक्षी दलों ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग को लेकर सदन को सिर पर उठा लिया। आलम यह रहा कि सदन की कार्यवाही शुरू होने के महज 5 मिनट के भीतर ही स्थगित करनी पड़ी और अंततः इसे 9 मार्च तक के लिए टाल दिया गया।
राहुल गांधी का ‘डेटा’ और सीधा हमला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को धार देते हुए सीधे प्रधानमंत्री मोदी और मंत्री पुरी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा , “मेरे पास जो डेटा है, उसे मैं प्रमाणित करने को तैयार हूँ। अमेरिकी न्याय विभाग की एपस्टीन फाइलों में हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम दर्ज हैं। सवाल यह है कि गंभीर आरोपों के बावजूद इन्हें जेल क्यों नहीं भेजा गया?”
राहुल गांधी के इस आक्रामक रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष इस मुद्दे को केवल एक विवाद नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और नैतिकता की बड़ी लड़ाई के रूप में देख रहा है।
हरदीप पुरी की सफाई: ‘मुलाकात औपचारिक, मंशा साफ’
विपक्ष के भारी शोर-शराबे और इस्तीफे की मांग के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनकी एपस्टीन से कुछ औपचारिक मुलाकातें हुई थीं, लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की आपराधिक या अनैतिक गतिविधि में शामिल होने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सत्ता पक्ष का तर्क है कि एक अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और मंत्री के तौर पर कई लोगों से मुलाकातें होती हैं, जिन्हें अपराध से जोड़ना राजनीति से प्रेरित है।
संसद से सड़क तक संग्राम: मुख्य बिंदु
- मकर द्वार पर प्रदर्शन कांग्रेस और विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर ‘हरदीप पुरी इस्तीफा दो’ के नारों के साथ भारी विरोध प्रदर्शन किया।
- सदन की कार्यवाही हंगामे के चलते लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे और फिर 9 मार्च की सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
- विपक्ष का आरोप विपक्ष का दावा है कि एपस्टीन फाइलों में नाम आना राष्ट्रीय सुरक्षा और नैतिक मूल्यों के साथ खिलवाड़ है।
- कॉर्पोरेट कनेक्शन राहुल गांधी ने उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम भी फाइलों में होने का दावा कर सरकार को घेरने की कोशिश की है।
क्या है एपस्टीन फाइल विवाद?
जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी अरबपति था, जिस पर नाबालिगों के यौन शोषण और मानव तस्करी के गंभीर आरोप थे। उसकी मौत के बाद कोर्ट के आदेश पर जारी फाइलों में दुनिया भर के शक्तिशाली राजनेताओं, व्यवसायियों और मशहूर हस्तियों के नाम सामने आए हैं। भारत में इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब केंद्रीय मंत्री का नाम इन दस्तावेजों से जुड़ने के दावे किए गए।
अब आगे क्या?
9 मार्च तक संसद के स्थगित होने से सरकार को इस विवाद को ठंडा करने का समय तो मिल गया है, लेकिन राहुल गांधी के ‘प्रमाणित डेटा’ के दावे ने सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। क्या आगामी सत्र में सरकार इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब दे पाएगी या विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी करेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।































