देश-विदेश

नागपुर दंगा मामला: फहीम खान के ध्वस्त घर पर HC सख्त, NMC से पूछा – पुनर्निर्माण करेंगे या मुआवजा देंगे?

नागपुर
Image Source - web

नागपुर दंगों के मुख्य आरोपी फहीम खान के घर को बुलडोजर से गिराए जाने के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर नगर निगम (एनएमसी) के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या नगर निगम ध्वस्त किए गए मकान का पुनर्निर्माण करेगा या फिर प्रभावित परिवार को आर्थिक मुआवजा देगा।

ये मामला उस कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें 17 मार्च को एनएमसी ने नागपुर के महल इलाके में स्थित फहीम खान के घर पर बुलडोजर चलाया था। ये कार्रवाई छत्रपति संभाजीनगर में मुगल सम्राट औरंगजेब के मकबरे से जुड़ी कथित भड़काऊ टिप्पणियों के बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा के संदर्भ में की गई थी। दंगों का मुख्य आरोप फहीम खान पर लगाया गया है।

हाई कोर्ट ने उठाए कानूनी प्रक्रिया पर सवाल

जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोडे की खंडपीठ ने फहीम खान की 69 वर्षीय मां मेहरूनिशा शमीम खान और अन्य आरोपियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान नगर निगम की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।

अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित अनिवार्य कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही विध्वंस की कार्रवाई की गई। बेंच ने नगर निगम को 4 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपना स्पष्ट रुख बताने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान ही गिराया गया था मकान

38 वर्षीय फहीम खान, जो अल्पसंख्यक लोकतांत्रिक पार्टी के शहर अध्यक्ष बताए जाते हैं, का संजयबाग कॉलोनी में तीन मंजिला मकान था। उनकी गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद, 25 मार्च को इस मकान को बुलडोजर से गिरा दिया गया।

उसी समय उनकी मां द्वारा दायर याचिका पर आपातकालीन सुनवाई चल रही थी। न्यायमूर्ति नितिन सांब्रे की अध्यक्षता वाली पीठ ने विध्वंस पर रोक लगाने का आदेश भी दिया था, लेकिन तब तक मकान पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका था।

सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया का उल्लंघन?

हाई कोर्ट ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय प्रक्रिया के तहत किसी भी कथित अवैध निर्माण को हटाने से पहले संबंधित पक्ष को पूर्व सूचना देना और जवाब देने के लिए कम से कम 15 दिन का समय देना अनिवार्य है।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विध्वंस निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया प्रतीत होता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

फहीम खान की ओर से पेश वकील अश्विन इंगोले ने दलील दी कि महाराष्ट्र क्षेत्रीय नगर नियोजन अधिनियम के तहत 21 मार्च, 2025 को विध्वंस नोटिस जारी किया गया था, जो 13 नवंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का उल्लंघन है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति के आपराधिक मामले में आरोपी होने के आधार पर उसकी संपत्ति को ध्वस्त नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट की बेंच ने इस कार्रवाई को प्रथम दृष्टया मनमानी और असंवैधानिक करार देते हुए नगर निगम से जवाब मांगा है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि संबंधित संपत्ति के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त थीं और वर्ष 2003 में नगर निगम को सभी भुगतान भी कर दिए गए थे। पिछले दो दशकों में कभी कोई आपत्ति नहीं उठाई गई, जिससे अचानक की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई कानूनी रूप से संदिग्ध प्रतीत होती है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में

फहीम खान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव लड़ा था और लगभग 1,000 वोट हासिल किए थे। उन्होंने शुरू से ही अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार और मनगढ़ंत बताया है।

नागपुर दंगा मामले में गिरफ्तार किए गए करीब 120 लोगों में से अधिकांश को जमानत या अग्रिम जमानत मिल चुकी है।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

अब सभी की निगाहें 4 मार्च को प्रस्तावित अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां नागपुर नगर निगम को ये स्पष्ट करना होगा कि वो ध्वस्त मकान के पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाएगा या प्रभावित परिवार को आर्थिक मुआवजा देगा।

ये मामला न केवल नागपुर दंगों से जुड़ा है, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

ये भी पढ़ें: NCP विलय पर सियासी भूचाल: बड़े नेता ने किया दावा – ‘पूरी कमान अजित दादा को सौंपने का था प्लान’

You may also like