महा शिवरात्रि 2026 का पावन पर्व भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन और विधि-विधान से की गई पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां पूजा के फल को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखा जाए। आइए जानते हैं वे 6 प्रमुख गलतियां, जिन्हें महाशिवरात्रि के दिन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
1. बिना स्नान और शुद्धि के जलाभिषेक करना
शिव पूजा से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धि आवश्यक मानी जाती है। बिना स्नान किए या अशुद्ध अवस्था में शिवलिंग पर जल चढ़ाना उचित नहीं माना जाता। पूजा से पहले स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और मन को शांत रखें।
2. गलत दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाना
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय दिशा का विशेष महत्व है। प्रायः उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। गलत दिशा में खड़े होकर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो सकता है।
3. शंख से जल न चढ़ाएं
भगवान शिव को शंख से जल अर्पित करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है। शंख समुद्र से संबंधित है और शिव पूजन में इसका प्रयोग नहीं किया जाता। जलाभिषेक के लिए तांबे या पीतल के पात्र का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
4. तुलसी दल अर्पित करना
तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय मानी जाती है, लेकिन शिवलिंग पर तुलसी अर्पित नहीं की जाती। शिव पूजा में बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग आदि विशेष रूप से चढ़ाए जाते हैं।
5. केतकी का फूल चढ़ाना
केतकी का फूल भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार एक कथा के कारण केतकी पुष्प शिव पूजा में वर्जित है। इसलिए महाशिवरात्रि के दिन इस फूल का प्रयोग न करें।
6. शिवलिंग की परिक्रमा पूरी करना
शिवलिंग की परिक्रमा करते समय जल निकासी की धारा (जिसे सोमसूत्र कहा जाता है) को लांघना या पूरी गोल परिक्रमा करना उचित नहीं माना जाता। परिक्रमा आधी या निर्धारित विधि से करनी चाहिए, ताकि पूजा शास्त्रसम्मत रहे।
जलाभिषेक का सही तरीका
सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए जल या दूध अर्पित करें।
बेलपत्र चढ़ाते समय उसकी डंडी ऊपर की ओर रखें।
पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें।
महाशिवरात्रि का महत्व
महाशिवरात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का पर्व माना जाता है। इस दिन किया गया उपवास, जप और अभिषेक विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा, संयम और सही विधि से की गई पूजा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाती है।
इस महाशिवरात्रि 2026 पर यदि आप भी शिवलिंग पर जल चढ़ाने जा रहे हैं, तो इन नियमों का ध्यान रखें ताकि आपकी पूजा पूर्ण फलदायी हो सके।
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