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भारत-फ्रांस की जुगलबंदी से एवरेस्ट फतह करेगा दुनिया का पहला ‘सुपर’ हेलीकॉप्टर

भारत-फ्रांस
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भारत और फ्रांस के संबंध अब केवल कागजों और समझौतों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848 मीटर) को छूने की तैयारी में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मंगलवार को हुई द्विपक्षीय वार्ता ने रक्षा और विमानन क्षेत्र में एक ऐसे क्रांतिकारी अध्याय की शुरुआत की है, जो अब तक असंभव माना जाता था।

एवरेस्ट की चोटी पर उतरेगा साझा ‘स्वदेशी’ दम
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में सबसे आकर्षण का केंद्र वह विशिष्ट हेलीकॉप्टर है, जिसे भारत और फ्रांस मिलकर विकसित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने गर्व के साथ घोषणा की कि यह दुनिया का पहला ऐसा हेलीकॉप्टर होगा जो इतनी अधिक ऊंचाई और विरल ऑक्सीजन में उड़ान भरकर एवरेस्ट की चोटी तक पहुँच सकेगा। यह न केवल तकनीकी चमत्कार होगा, बल्कि दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में बचाव कार्यों और रणनीतिक बढ़त के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

रणनीतिक साझेदारी को मिला ‘स्पेशल’ दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी ने मैक्रों के साथ साझा बयान में कहा कि भारत और फ्रांस की दोस्ती दशकों पुरानी और अटूट भरोसे पर टिकी है। इसी विश्वास को देखते हुए अब इस रिश्ते को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का नाम दिया गया है।
आज की अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में, भारत-फ्रांस की यह साझेदारी दुनिया के लिए स्थिरता और प्रगति का सबसे मजबूत आधार बनेगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

2026: नवाचार का साल (Year of Innovation)
द्विपक्षीय वार्ता के मुख्य बिंदु:

  • नवाचार का वर्ष: दोनों नेताओं ने वर्ष 2026 को आधिकारिक तौर पर ‘ईयर ऑफ इनोवेशन’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया।
  • निरंतर संवाद: अब दोनों देशों के विदेश मंत्री हर साल मुलाकात करेंगे ताकि समझौतों की प्रगति की समीक्षा की जा सके और रिश्तों को नई ऊर्जा दी जा सके।
  • इनोवेशन फोरम: ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन फोरम’ को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने भारतीय प्रतिभा का लोहा माना।

तकनीक का नेतृत्व करता भारत
राष्ट्रपति मैक्रों ने भारतीय मेधा की प्रशंसा करते हुए वैश्विक दिग्गजों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी बड़ी कंपनियों का नेतृत्व भारतीय कर रहे हैं। मैक्रों के शब्दों में— “भारत अब नई तकनीकों और आविष्कारों में केवल हिस्सा लेने वाला देश नहीं रहा, बल्कि वह भविष्य की दिशा तय करने वाला नेतृत्वकर्ता बन चुका है।”

भारत और फ्रांस का यह मिलन केवल दो देशों का समझौता नहीं, बल्कि पूर्व और पश्चिम की दो महान शक्तियों का एक ऐसा संगम है, जो अंतरिक्ष से लेकर हिमालय की चोटियों तक अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। एवरेस्ट की ऊंचाई तक जाने वाला हेलीकॉप्टर इस नई ‘स्पेशल’ साझेदारी की बुलंदियों का प्रतीक बनेगा।

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