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विकसित भारत @2047: 35 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वैश्विक साझेदारी का नया युग

विकसित भारत @2047
विकसित भारत @2047

विकसित भारत @2047: “भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता केवल एक बिजनेस डील नहीं, बल्कि दुनिया के लिए भारत के स्वर्णिम भविष्य में साझेदारी का एक खुला निमंत्रण है।” यह उद्गार केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मुंबई में आयोजित तीन दिवसीय ‘ग्लोबल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन 2026’ सम्मेलन के दौरान व्यक्त किए।

केंद्रीय मंत्री ने भारत की विकास यात्रा का खाका पेश करते हुए स्पष्ट किया कि भारत आज न केवल दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक विकास का नया इंजन भी बन चुका है।

आर्थिक महाशक्ति बनने की राह
पीयूष गोयल ने भारत के आगामी दो दशकों के लक्ष्य को अत्यंत स्पष्टता के साथ दुनिया के सामने रखा:

  • 2027-28 तक: भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दहलीज पर है।
  • 2047 तक: भारत का लक्ष्य 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर की एक पूर्ण विकसित अर्थव्यवस्था बनना है।
  • वैश्विक योगदान: अगले 21 वर्षों में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में अकेले 26 ट्रिलियन डॉलर का योगदान जोड़ेगा, जो इतिहास में विकास का सबसे अभूतपूर्व अवसर होगा।

व्यापार समझौतों का ‘सुपरफास्ट’ दौर
भारत की ‘ईमानदारी और पारदर्शिता’ की नीति का ही परिणाम है कि दुनिया के तमाम विकसित देश भारत के साथ हाथ मिलाने को आतुर हैं। पिछले चार वर्षों का रिकॉर्ड इसकी गवाही देता है:

  • 9 प्रमुख समझौते: पिछले 4 वर्षों में भारत ने 9 बड़े व्यापार समझौते संपन्न किए हैं।
  • वैश्विक पहुंच: वर्तमान में भारत के 16 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और 6 वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते (PTA) प्रभावी हैं, जिनके माध्यम से भारत 38 विकसित देशों के साथ आर्थिक रूप से जुड़ा हुआ है।

‘नेशन फर्स्ट’: राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं
केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत अपनी व्यापारिक नीतियों में ‘राष्ट्रहित’ को सर्वोपरि रखता है। समझौतों के दौरान निम्नलिखित क्षेत्रों को ‘सुरक्षा कवच’ प्रदान किया जाता है:

  • संवेदनशील क्षेत्र: किसान, एमएसएमई (MSME), महिलाएं और स्थानीय उद्योग।
  • निर्यात पर जोर: टेक्सटाइल, फुटवियर, लेदर, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए नए वैश्विक बाजार तलाशने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ग्लोबल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन 2026: मंथन के मुख्य बिंदु
मुंबई में जुटे दुनिया भर के मंत्रियों और उद्योगपतियों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर चर्चा हो रही है:

  • सप्लाई चेन विविधीकरण: चीन पर निर्भरता कम कर वैकल्पिक और मजबूत सप्लाई चेन बनाना।
  • तकनीकी क्रांति: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का आर्थिक विकास में उपयोग।
  • भविष्य का निवेश: इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार गलियारों (Trade Corridors) का विस्तार।
  • सतत विकास: पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।

पीयूष गोयल का यह संबोधन स्पष्ट करता है कि भारत अब वैश्विक नीतियों का केवल अनुसरण करने वाला देश नहीं, बल्कि उन्हें ‘रीशेप’ (नया आकार) देने वाला देश बन गया है। 2047 का ‘विकसित भारत’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि आंकड़ों पर आधारित एक ठोस हकीकत है।

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