Maharashtra Rajya Sabha Elections: महाराष्ट्र की सात राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनावों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो सत्ताधारी महायुति (भाजपा-शिवसेना-राकांपा) पूरी तरह से फ्रंट फुट पर नजर आ रही है, जबकि विपक्षी महाविकास आघाडी (MVA) के लिए अपनी इकलौती सीट बचाना भी एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।
विधानसभा का गणित: 6 बनाम 1 की जंग
288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में वर्तमान में दो सीटें (अजित पवार और शिवाजीराव कर्डिले के निधन के कारण) रिक्त हैं। प्रभावी संख्या बल के आधार पर महायुति की स्थिति अत्यंत सुदृढ़ है।
| गठबंधन / दल | विधायकों की संख्या | संभावित सीटें |
|---|---|---|
| महायुति (NDA) | 235 (भाजपा: 131, शिंदे गुट: 57, अजित पवार गुट: 40 + अन्य) | 06 |
| महाविकास आघाडी (INDIA) | ~46 (यूबीटी: 20, कांग्रेस: 16, शरद पवार गुट: 10) | 01* |
महाविकास आघाडी की संभावित सीट संख्या मौजूदा आंकड़ों के आधार पर अनुमानित है।
संभावित सीट बंटवारा (सूत्रों के अनुसार – महायुति):
| दल | संभावित सीटें |
|---|---|
| भाजपा | 4 |
| शिंदे गुट | 1 |
| अजित पवार गुट | 1 |
‘क्रॉस वोटिंग’ और ‘नाराजगी’: चुनाव का सस्पेंस
भले ही कागज पर महायुति के पास 6 सीटें जीतने का बहुमत है, लेकिन राज्यसभा चुनाव का इतिहास गवाह है कि यहाँ असली खेल पर्दे के पीछे होता है।
- निर्दलीय विधायकों की भूमिका: सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजरें निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों पर टिकी हैं, जो पासा पलटने की क्षमता रखते हैं।
- पार्टी के भीतर असंतोष: टिकट वितरण को लेकर अगर किसी दल में नाराजगी उभरती है, तो गुप्त मतदान (Secret Ballot) का फायदा उठाकर ‘क्रॉस वोटिंग’ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- MVA की एकजुटता: कांग्रेस, उद्धव सेना और शरद पवार गुट के सामने अपने विधायकों को टूटने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। यदि एमवीए के विधायक छिटकते हैं, तो उनकी एक सीट भी खतरे में पड़ सकती है।
दिलचस्प मोड़: क्या मतदान की नौबत आएगी?
यदि महायुति और एमवीए केवल उतनी ही सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं जितनी उनके पास संख्या है, तो चुनाव निर्विरोध (Unopposed) हो सकता है। लेकिन, यदि किसी भी पक्ष ने एक ‘अतिरिक्त’ उम्मीदवार मैदान में उतारा, तो यह मुकाबला हॉर्स ट्रेडिंग और रणनीतिक घेराबंदी के चरम तक पहुँच जाएगा।
राजनीतिक गलियारों की चर्चा: महायुति अपनी छठी सीट के लिए पूरी तरह आश्वस्त है, लेकिन असली परीक्षा विपक्षी गठबंधन की है, जिन्हें यह साबित करना होगा कि उनके विधायक आज भी वैचारिक रूप से उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।
- भाजपा की ताकत: 131 विधायकों के साथ भाजपा न केवल अपनी 4 सीटें सुरक्षित रखेगी, बल्कि सहयोगियों को जिताने में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाएगी।
- अस्तित्व की लड़ाई: शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार) के लिए यह चुनाव यह दिखाने का मौका है कि विपरीत परिस्थितियों में भी उनका कैडर उनके साथ है।






























