SIR: भारतीय चुनाव आयोग (ECI) देश की मतदाता सूचियों को पूरी तरह ‘क्लीन’ और अपडेट करने के अपने मिशन के निर्णायक चरण में पहुंच गया है। लगभग 20 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, महाराष्ट्र, दिल्ली और पंजाब समेत 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की तैयारी शुरू हो गई है।
यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा कदम है।
दो दशक पुराना ‘डेटा’ होगा अपडेट
यह समझना महत्वपूर्ण है कि अधिकांश राज्यों में पिछला गहन पुनरीक्षण 2002 से 2004 के बीच हुआ था। पिछले 20-22 वर्षों में भारत की जनसांख्यिकी (Demographics) में भारी बदलाव आया है।
- माइग्रेशन: लोग काम के सिलसिले में एक राज्य से दूसरे राज्य चले गए।
- मृत्यु दर: लाखों मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जिनके नाम अभी भी सूचियों में हो सकते हैं।
- शहरीकरण: नए रिहायशी इलाके बसे हैं, जिससे पुराने मतदान केंद्रों का समीकरण बदल गया है।
महाराष्ट्र का उदाहरण
महाराष्ट्र में पिछला SIR 2002 में हुआ था। तब से अब तक तकनीक और आबादी के घनत्व में जो बदलाव आए हैं, उन्हें इस प्रक्रिया के जरिए पहली बार सही ढंग से दर्ज किया जाएगा।
अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान
चुनाव आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 से इस प्रक्रिया का अंतिम चरण शुरू कर दिया जाए। जून 2025 में शुरू हुए इस राष्ट्रव्यापी अभियान के पहले दो चरणों में बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों को कवर किया जा चुका है।
तीसरे चरण में शामिल प्रमुख राज्य/UT:
महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, दिल्ली, कर्नाटक, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, ओडिशा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्य समेत कुल 22 क्षेत्र।
SIR क्यों है ‘विशेष’ और ‘गहन’?
सामान्य पुनरीक्षण (SSR) हर साल होता है, लेकिन ‘गहन पुनरीक्षण’ (SIR) में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। इसमें निम्नलिखित बातों पर जोर दिया जाता है:
- फोटो की शुद्धता: धुंधली या पुरानी फोटो को बदलना।
- डुप्लीकेट नामों का निष्कासन: एक ही व्यक्ति का नाम दो जगहों पर होने की समस्या का अंत।
- युवा मतदाताओं का पंजीकरण: 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले हर नागरिक का नाम जोड़ना।
- आधार लिंकिंग: डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक आधार लिंकिंग को बढ़ावा देना।
भविष्य का रोडमैप
एक बार यह चरण पूरा हो जाने के बाद, पूरा भारत एक ही ‘कट-ऑफ’ मानक पर आ जाएगा। यह प्रक्रिया देश में ‘एक राष्ट्र, एक मतदाता सूची’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करेगी। चुनाव आयोग का लक्ष्य जून 2025 के आदेश के अनुरूप पूरे देश की मतदाता सूची को दोषमुक्त और आधुनिक बनाना है।





























