Black market for wombs: मुंबई से सटे बदलापुर में मानवता को झकझोर देने वाला एक ऐसा संगठित अपराध सामने आया है, जिसने मेडिकल एथिक्स और कानून की धज्जियां उड़ा दी हैं। जोवेली इलाके के ‘नैनो सिटी’ परिसर में गरीब महिलाओं के अंडाणुओं (Oocytes) की अवैध निकासी और बिक्री करने वाले एक बड़े रैकेट का पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने पर्दाफाश किया है।
ऑपरेशन ‘ममता का सौदा’: कैसे हुआ भंडाफोड़?
बदलापुर पूर्व के जोवेली क्षेत्र में चल रहे इस अवैध गोरखधंधे की गुप्त सूचना पुलिस को मिली थी। इसके बाद उपजिला अस्पताल की मुख्य वैद्यकीय अधिकारी डॉ. ज्योत्सना सावंत के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने जब छापेमारी की, तो वहां का नजारा देख अधिकारी दंग रह गए।
मॉडस ऑपरेंडी: पैसों का लालच और शरीर से खिलवाड़
जांच में सामने आया कि आरोपी महिलाएं एक सोची-समझी साजिश के तहत काम करती थीं:
- शिकार का चयन: आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब महिलाओं को निशाना बनाया जाता था।
- हार्मोनल छेड़छाड़: महिलाओं को भारी मात्रा में हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे ताकि उनके गर्भाशय में अंडाणुओं (स्त्री-बीज) की संख्या प्राकृतिक सीमा से कहीं अधिक बढ़ जाए।
- अवैध निकासी: इसके बाद इन महिलाओं को विभिन्न आईवीएफ (IVF) केंद्रों पर ले जाकर
सर्जरी के जरिए अंडाणु निकाल लिए जाते थे।
कीमत: पीड़ित महिलाओं को हर बार 25 से 30 हजार रुपये थमा दिए जाते थे, जबकि बाजार में इसकी कीमत लाखों में वसूली जाती थी।
बरामदगी: इंजेक्शन, फर्जी दस्तावेज और शपथपत्र
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से ऐसे सबूत बरामद किए हैं जो एक गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं:
- मेडिकल सबूत: स्त्री-बीज वृद्धि वाले प्रतिबंधित इंजेक्शन और सोनोग्राफी की तस्वीरें।
- जालसाजी: फर्जी नामों से बनाए गए शपथपत्र और नकली दस्तावेज, ताकि कानूनी पहचान छिपाई जा सके।
- लेन-देन: भारी मात्रा में आर्थिक लेन-देन के रिकॉर्ड और दवाओं की तस्वीरें।
पुलिस की गिरफ्त में ‘लेडी सिंडिकेट’
इस मामले में पुलिस ने तीन मास्टरमाइंड महिलाओं को गिरफ्तार किया है, जो इस रैकेट को संचालित कर रही थीं:
- सुलक्षणा गाडेकर (44)
- अश्विनी चाबुकस्वार (29)
- मंजुषा वानखेड़े (46)
| विवरण | प्रमुख जानकारी |
|---|---|
| प्रभावित महिलाएं | 20 से अधिक (प्रारंभिक जांच में) |
| मुख्य स्थान | नैनो सिटी, जोवेली, बदलापुर पूर्व |
| बरामद सामग्री | इंजेक्शन, सोनोग्राफी फोटो, फर्जी शपथपत्र |
| अपराध की प्रकृति | संगठित मानव अंगों (अंडाणु) की तस्करी और शोषण |
जांच का अगला चरण: कौन से अस्पताल और डॉक्टर शामिल?
यह रैकेट पहले वांगणी क्षेत्र में सक्रिय था और हाल ही में बदलापुर स्थानांतरित हुआ था। पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि बिना डॉक्टरों की मिलीभगत के अंडाणु निकालना संभव नहीं है। ऐसे में कई बड़े आईवीएफ सेंटर और डॉक्टर रडार पर हैं।
यह मामला केवल एक अवैध व्यापार नहीं है, बल्कि गरीब महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ किया गया एक खतरनाक खिलवाड़ है। बार-बार अंडाणु निकालने के लिए दिए गए भारी इंजेक्शन इन महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। प्रशासन के लिए अब चुनौती उन सफेदपोश चेहरों को बेनकाब करने की है, जो इस काले कारोबार के असली खरीदार हैं।































