Simhastha Kumbh 2026: आस्था के सबसे बड़े समागम ‘सिंहस्थ कुंभ’ के लिए इस बार नाशिक और त्र्यंबकेश्वर में इतिहास रचने की तैयारी है। प्रशासन ने अखाड़ों की सहमति से एक क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए त्र्यंबकेश्वर में 2 किलोमीटर लंबा नया ‘अमृत घाट’ बनाने का फैसला किया है। यह कदम न केवल भीड़ प्रबंधन को सुगम बनाएगा, बल्कि कुंभ के इतिहास में पहली बार शाही स्नान के लिए एक आधुनिक और विस्तृत विकल्प भी प्रदान करेगा।
कुशावर्त तीर्थ की सीमाओं का समाधान: नया घाट
त्र्यंबकेश्वर में अब तक पारंपरिक रूप से ‘कुशावर्त तीर्थ’ पर ही अखाड़े शाही स्नान करते रहे हैं। हालांकि, कुशावर्त का स्थान सीमित होने के कारण वहां लाखों की भीड़ को नियंत्रित करना हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है।
- दूरी और स्थान: नया घाट कुशावर्त तीर्थ से करीब 1 किमी की दूरी पर विकसित किया जा रहा है।
- पवित्र जल: प्रशासन की योजना इस नए घाट पर गोदावरी का शुद्ध और निर्मल जल पहुंचाने की है, ताकि स्नान की पवित्रता बनी रहे।
- ऐतिहासिक ध्वजारोहण: कुंभ मेले के आधिकारिक शुभारंभ का प्रतीक ‘ध्वजारोहण’ भी इस बार पहली बार इसी नए घाट पर आयोजित किया जाएगा।
12 करोड़ श्रद्धालुओं का महाकुंभ: अनुमानित आंकड़े
| गंतव्य (Destination) | अनुमानित श्रद्धालु संख्या (Estimated Pilgrims) |
|---|---|
| नाशिक (मुख्य शहर) | लगभग 8 करोड़ |
| त्र्यंबकेश्वर | लगभग 4 करोड़ |
| कुल योग (Total) | लगभग 12 करोड़ |
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा सिंहस्थ
मेला आयुक्त के अनुसार, प्रशासन का ध्यान केवल घाट निर्माण पर ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर भी है:
- भीड़ नियंत्रण (Crowd Management): 2 किमी लंबे घाट के कारण भगदड़ जैसी स्थितियों का खतरा कम होगा और श्रद्धालुओं को स्नान के लिए अधिक जगह मिलेगी।
- स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर: घाट परिसर में आधुनिक सूचना केंद्र, चिकित्सा शिविर, क्लॉक रूम और सुरक्षा के लिए हाई-टेक सीसीटीवी नेटवर्क लगाया जाएगा।
- स्वच्छता और जल प्रबंधन: गोदावरी के प्रवाह को बनाए रखने और जल को प्रदूषित होने से बचाने के लिए विशेष फिल्ट्रेशन प्लांट और ड्रेनेज सिस्टम पर काम शुरू हो चुका है।
अखाड़ों की सहमति: कूटनीतिक जीत
परंपराओं को बदलने या नए स्थान चुनने में अक्सर अखाड़ों की सहमति प्राप्त करना कठिन होता है। लेकिन प्रशासन ने लंबी चर्चा के बाद साधु-संतों को नए घाट के महत्व और सुरक्षा के पहलुओं पर राजी कर लिया है। अखाड़ों ने भी श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि मानते हुए इस बदलाव को अपनी स्वीकृति दे दी है।
मेला आयुक्त का संदेश: “हमारा उद्देश्य केवल परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि सुरक्षा और आधुनिकता के बीच एक ऐसा संतुलन बनाना है जिससे दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालु एक सुखद आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटें।” यह नया घाट सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को एक नई वैश्विक पहचान देने के लिए तैयार है।






























