देश-विदेश

भविष्य की जंग के लिए भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’: 6th Generation फाइटर जेट और AI डिफेंस के साथ सैन्य शक्ति में क्रांतिकारी बदलाव

AI डिफेंस
Image Source - Web

ईरान और मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध के बादलों के बीच, भारत ने अपनी सैन्य रणनीति को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है। अब भारत केवल रक्षात्मक नहीं, बल्कि ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ (बिना आमने-सामने आए युद्ध) के युग में प्रवेश कर रहा है। हाल ही में संसद में पेश रक्षा समिति की रिपोर्ट ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। भारत ने अब आधिकारिक तौर पर छठी पीढ़ी (6th Generation) के लड़ाकू विमान के डिजाइन और भविष्य की घातक तकनीकों पर युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है।

1. 6th Generation और AMCA: आसमान का नया सुल्तान
भारत अब केवल 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (AMCA) तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, डीआरडीओ (DRDO) और वैमानिकी विकास एजेंसी ने छठी पीढ़ी के विमानों के लिए वैचारिक डिजाइन पर काम शुरू कर दिया है। ये विमान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस होंगे, जो बिना पायलट के भी दुश्मन के रडार को चकमा देकर हमला करने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही स्वदेशी फाइटर इंजन के निर्माण में भी तेजी लाई गई है, ताकि लंबी दूरी के मिशनों में भारत आत्मनिर्भर रहे।

2. ‘अनंत शस्त्र’ और अभेद्य सुरक्षा कवच
आधुनिक युद्धों में ड्रोन के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) परियोजना शुरू की है। यह तकनीक ड्रोन के झुंड (Swarm Drones) को पलक झपकते ही हवा में राख करने की क्षमता रखती है। वहीं, लंबी दूरी की मिसाइल रक्षा प्रणाली (LRSAM), जिसे ‘स्वदेशी S-400’ भी कहा जा रहा है, भारत की सीमाओं के चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा घेरा तैयार करेगी जिसे भेदना नामुमकिन होगा।

3. मिसाइल शक्ति: मार्क-II वेरिएंट का कहर
भारत की पुरानी मिसाइल प्रणालियों को अब ‘स्मार्ट और घातक’ बनाया जा रहा है:
* अस्त्र (Astra) Mark-II: हवा से हवा में मार करने वाली यह मिसाइल अब और भी अधिक दूरी तक दुश्मन के विमानों का पीछा कर उन्हें नष्ट करेगी।
* नाग और ध्रुवास्त्र: टैंक रोधी इन मिसाइलों के नए वेरिएंट अचूक सटीकता और अधिक मारक क्षमता के साथ तैयार किए जा रहे हैं।

4. बजट का ‘महा-आवंटन’: आत्मनिर्भरता की ओर कदम
रक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इन महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स के लिए खजाना खोल दिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,19,306.47 करोड़ का पूंजीगत परिव्यय आवंटित किया गया है। यह भारी-भरकम निवेश विशेष रूप से नौसेना के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच, साइबर डिफेंस और एआई-आधारित युद्ध प्रणालियों को विकसित करने के लिए है।

भारत का यह कदम साफ संकेत है कि वह अब वैश्विक रक्षा तकनीक में केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि एक ‘लीडर’ बनने की ओर अग्रसर है। ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ की तैयारी भारत को आने वाले दशकों में दुनिया की सबसे आधुनिक सैन्य शक्तियों की कतार में सबसे आगे खड़ा कर देगी।

ये भी पढ़ें: ट्रंप का ‘युद्धविराम’ दांव या मास्टरस्ट्रोक? ईरान ने वार्ता को बताया ‘फेक न्यूज’, इजराइल भी हैरान!

You may also like