मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की तमाम कोशिशें धराशायी होती दिख रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तावित युद्धविराम का असर जमीन पर शून्य नजर आ रहा है। सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात ईरान ने जो आक्रामक रुख अपनाया, उसने न केवल इजराइल बल्कि खाड़ी के प्रमुख अरब देशों—बहरीन, यूएई और सऊदी अरब—को भी सीधे युद्ध की आग में झोंक दिया है।
ईरान का ‘मिसाइल तांडव’ और डिजिटल युद्ध
ईरान ने एक साथ कई मोर्चों पर ताबड़तोड़ मिसाइल हमले किए हैं। इस हमले की सबसे बड़ी चोट बहरीन स्थित अमेजन (Amazon) के क्लाउड सेंटर पर पड़ी है। ईरान के इस रणनीतिक प्रहार ने खाड़ी देशों में अमेजन की क्लाउड सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया है। यह दर्शाता है कि ईरान अब केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि दुश्मन देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर भी हमला कर रहा है।
इजराइल का पलटवार और लेबनान पर कब्जे की तैयारी
ईरानी हमलों के जवाब में इजराइल ने भी अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। इजराइली वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान और परमाणु केंद्र के रूप में चर्चित बुशहर पर भीषण बमबारी की है।
वहीं, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल कात्ज के बयान ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इजराइल अब केवल बचाव नहीं करेगा, बल्कि दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के प्लान को अंतिम रूप देने जा रहा है। इसके लिए इजराइली ग्राउंड फोर्स को रवाना करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
सऊदी अरब का चौंकाने वाला रुख: ‘युद्धविराम नहीं, हमला करो’
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के रुख से आया है। सूत्रों के मुताबिक, MBS ने राष्ट्रपति ट्रम्प से दो-टूक कहा है कि:
अब युद्धविराम का समय बीत चुका है। ईरान पर फिर से हमले शुरू किए जाने चाहिए। यह खाड़ी की सुरक्षा और भविष्य को नए सिरे से तय करने का एक ऐतिहासिक अवसर है।”
सऊदी अरब का यह कड़ा रुख संकेत दे रहा है कि खाड़ी के देश अब ईरान के बढ़ते प्रभाव और हमलों को स्थायी रूप से खत्म करने के पक्ष में हैं। माना जा रहा है कि सऊदी अरब ने अपने ‘किंग फहद’ सैन्य ठिकानों को भी सक्रिय कर दिया है।
* वैश्विक संकट: यदि यह युद्ध और खिंचता है, तो कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी, जिससे दुनिया भर में महंगाई का संकट पैदा हो सकता है।
* ट्रम्प की प्रतिष्ठा दांव पर: राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक विफलता है। अब देखना यह होगा कि वह सऊदी अरब के ‘हमले’ वाले सुझाव को मानते हैं या शांति का कोई नया रास्ता निकालते हैं।
* डिजिटल ब्लैकआउट: अमेजन क्लाउड सेंटर पर हमला यह साबित करता है कि भविष्य के युद्ध ‘साइबर और इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर आधारित होंगे।
खाड़ी देश इस समय बारूद के ढेर पर बैठे हैं। इजराइल का लेबनान में घुसना और ईरान का अरब देशों पर सीधा हमला करना इस बात का संकेत है कि अब पूर्णकालिक युद्ध को टालना मुश्किल होता जा रहा है।





























