महाराष्ट्र के नाशिक से शुरू हुआ ‘फर्जी बाबा’ कैप्टन अशोक खरात का मामला अब महज एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि देश को झकझोर देने वाला एक भयावह स्कैंडल बन चुका है। अध्यात्म और आस्था की ओट में छिपे इस दरिंदे के काले कारनामों ने मानवता को शर्मसार कर दिया है।
300 अश्लील वीडियो और अनगिनत यौन शोषण
जांच में जुटी विशेष जांच टीम (SIT) के सामने जो खुलासे हो रहे हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। चर्चा है कि जांच के दौरान पुलिस के हाथ करीब 300 अश्लील वीडियो लगे हैं, जिन्हें खरात ने महिलाओं को ब्लैकमेल करने और अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए रिकॉर्ड किया था। जब SIT के अधिकारियों ने उससे पूछा कि उसने अब तक कितनी महिलाओं का यौन शोषण किया है, तो उसने बड़ी ही बेशर्मी से जवाब दिया— “मुझे संख्या याद नहीं है।” उसका यह जवाब उसकी विकृत मानसिकता और अपराध की गहराई को दर्शाने के लिए काफी है।
रुपाली चाकणकर पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने तब राजनीतिक मोड़ ले लिया जब महाराष्ट्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष रुपाली चाकणकर पर आरोपी खरात को संरक्षण देने के आरोप लगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों और वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया है। इन तस्वीरों में चाकणकर कभी स्वयंभू बाबा खरात के पैरों में गिरकर आशीर्वाद लेती नजर आ रही हैं, तो कभी उसे धूप से बचाने के लिए खुद छाता थामे उसके साथ चलती दिख रही हैं। जिस पद पर बैठकर उन्हें महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी थी, उसी पद पर रहते हुए एक यौन अपराधी के प्रति उनकी यह ‘भक्ति’ अब सवालों के घेरे में है।
SIT का शिकंजा और नोटिस से बढ़ी हलचल
SIT ने मामले की कड़ियाँ जोड़ने के लिए अब रुपाली चाकणकर को पूछताछ का नोटिस जारी किया है। जैसे ही जांच की आंच उन तक पहुँची, उन्होंने नाशिक आने को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि खरात को मिलने वाले राजनीतिक संरक्षण के बिना इतने बड़े स्तर पर यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग का खेल लंबे समय तक चलना मुमकिन नहीं था। SIT यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या चाकणकर ने अपने पद का रसूख इस्तेमाल कर खरात के खिलाफ पहले आने वाली शिकायतों को दबाया था।
आगे की राह
फिलहाल खरात न्यायिक हिरासत में है, लेकिन SIT की सक्रियता बता रही है कि इस ‘सेक्स स्कैंडल’ में कई और बड़े नाम बेनकाब हो सकते हैं। खरात के पापों की फेहरिस्त जितनी लंबी है, उससे जुड़े मददगारों की सूची भी उतनी ही चौंकाने वाली होने की उम्मीद है। पूरा महाराष्ट्र अब यह मांग कर रहा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिल सके।
कड़वा सच: जब रक्षक ही भक्षकों के पैरों में गिरकर उन्हें छाता दिखाने लगें, तो समाज में न्याय की उम्मीद धुंधली पड़ने लगती है। खरात का यह मामला इसी व्यवस्थागत खामी का जीता-जागता उदाहरण है।































