महाराष्ट्र

पुणे में कुदरत का ‘जल-तांडव’: 3 घंटे की बारिश ने तोड़ा 130 साल का रिकॉर्ड, सड़कें बनीं नदियां, एक की मौत!

पुणे
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महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में गुरुवार की दोपहर ‘प्रलय’ जैसी साबित हुई। महज 3 घंटे की तूफानी बारिश ने पूरे शहर को घुटनों पर ला दिया। आसमान से बरसी इस आफत ने न केवल जनजीवन अस्त-व्यस्त किया, बल्कि मौसम विभाग के 130 साल पुराने आंकड़ों को भी ध्वस्त कर दिया।

130 साल का रिकॉर्ड धराशायी
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, गुरुवार को पुणे में 65 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह अप्रैल के महीने में होने वाली अब तक की सर्वाधिक बारिश है। इससे पहले 4 अप्रैल 1896 को 51.1 मिमी बारिश का रिकॉर्ड दर्ज था। 13 दशकों के बाद प्रकृति के इस अप्रत्याशित व्यवहार ने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है।

शहर में तबाही का मंजर
शाम के समय अचानक शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोल दी:
* सड़कें बनीं नदियां: शहर की मुख्य सड़कें और गलियां जलमग्न हो गईं। कई निचले इलाकों में घुटनों तक पानी भर गया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
* बहने लगे वाहन: पानी का बहाव इतना तेज था कि सड़कों पर खड़े दुपहिया और चार पहिया वाहन तिनकों की तरह बहते नजर आए।
* पेड़ गिरने से हादसा: तेज हवाओं और बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में पेड़ उखड़ गए। दुर्भाग्यवश, एक पेड़ गिरने की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई।
अगले 3 दिन ‘येलो अलर्ट’ जैसी स्थिति

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राहत अभी दूर है। अगले 3 दिनों तक शहर और आसपास के इलाकों में इसी तरह की बारिश और गरज-चमक का अनुमान है। प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से जलजमाव वाले क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।
तुलनात्मक विश्लेषण: अप्रैल की बारिश

मापदंड विवरण (गुरुवार, 2026) पिछला रिकॉर्ड (1896)
कुल बारिश 65 मिमी 51.1 मिमी
समय अवधि मात्र 3 घंटे

मुख्य प्रभाव रिकॉर्ड तोड़ जलजमाव, 1 मौत ऐतिहासिक डेटा
प्रशासनिक सतर्कता: पुणे नगर निगम (PMC) और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित इलाकों से पानी निकालने और गिरे हुए पेड़ों को हटाने के काम में जुटी हैं। बिजली विभाग को भी एहतियात के तौर पर कुछ इलाकों की सप्लाई काटने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शॉर्ट सर्किट से बचा जा सके।

पुणे में अप्रैल के महीने में इस तरह की ‘मानसूनी’ बारिश जलवायु परिवर्तन के खतरों की ओर इशारा कर रही है। शहर के ड्रेनेज सिस्टम की विफलता और अप्रत्याशित मौसम ने एक बार फिर शहरी बुनियादी ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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