ईरान युद्ध के चलते सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के बंद होने से दुनिया की रसोई का बजट और सुरक्षा दोनों चरमरा गए हैं। वैश्विक व्यापार की इस जीवन रेखा से दुनिया का 20% कच्चा तेल और एलपीजी (LPG) गुजरता है, जिसकी आपूर्ति रुकने से अब देशों के बीच ईंधन के लिए ‘महायुद्ध’ छिड़ गया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इसे 1974 के तेल संकट के बाद की सबसे बड़ी और भयावह आपूर्ति बाधा करार दिया है।
दुनिया में कोहराम: कहीं इमरजेंसी, कहीं बंद हुई यूनिवर्सिटी
होर्मुज की नाकेबंदी का असर अब देशों की सीमाओं को लांघकर आम नागरिक की थाली तक पहुँच गया है:
* फिलीपींस: ईंधन की भारी कमी के कारण देश में ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ घोषित कर दिया गया है।
* नेपाल: सप्लाई चेन टूटने से प्रशासन ने राशनिंग लागू कर दी है, अब परिवारों को केवल आधा सिलेंडर ही मिल पा रहा है।
* बांग्लादेश: गैस की कमी से बिजली और परिवहन ठप होने के चलते कई प्रमुख विश्वविद्यालयों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया गया है।
* भारत: देश के कई हिस्सों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिससे पैनिक बाइंग (घबराहट में खरीदारी) का माहौल है।
भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’: गैस छोड़ इंडक्शन की ओर मुड़े कदम
संकट के बीच भारतीयों ने हमेशा की तरह जुगाड़ और तकनीक का सहारा लिया है। एलपीजी का संकट बढ़ने के साथ ही इलेक्ट्रिक कुकिंग अचानक मुख्यधारा में आ गई है।
* इंडक्शन की धूम: देश में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में 30 गुना (3000%) का उछाल आया है। लोग गैस सिलेंडर के महंगे और अनिश्चित विकल्प के बजाय बिजली से खाना बनाना सस्ता और सुलभ मान रहे हैं।
* 20% की बचत: आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा गैस कीमतों की तुलना में इलेक्ट्रिक कुकिंग लगभग 20% सस्ती पड़ रही है।
राज्यों में ‘ग्रीन एनर्जी’ का उदय
गैस की किल्लत ने पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की ओर लौटने की गति तेज कर दी है:
* महाराष्ट्र और केरल: यहाँ घरों और सोसायटियों में बायोगैस प्लांट लगाने की मांग में जबरदस्त तेजी आई है।
* गुजरात: ग्रामीण इलाकों में सोलर कुकर और सौर ऊर्जा से चलने वाले चूल्हों को बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है।
* कॉर्पोरेट सेक्टर: दिग्गज आईटी कंपनी कैपजेमिनी (Capgemini) जैसी संस्थाओं ने अपनी कैंटीनों को पूरी तरह बायो-सीएनजी पर शिफ्ट कर दिया है, ताकि सप्लाई चेन के झटकों से बचा जा सके।
सरकार की तैयारी: ‘आत्मनिर्भर कुकटॉप’ मिशन
बढ़ती मांग को देखते हुए भारत सरकार ने देश के भीतर इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक हीटिंग उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने के लिए उद्योग जगत के साथ आपात बैठकें शुरू कर दी हैं। लक्ष्य यह है कि भविष्य में रसोई गैस के लिए मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भरता को न्यूनतम किया जा सके।
होर्मुज जलमार्ग का संकट भले ही युद्ध की उपज हो, लेकिन इसने दुनिया को यह सबक दे दिया है कि जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर निर्भरता कितनी जोखिम भरी है। भारत में आया यह ‘इंडक्शन और बायोगैस’ का उछाल केवल एक तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक स्थायी ‘कुकिंग रिवॉल्यूशन’ की शुरुआत साबित हो सकता है।
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