महाराष्ट्र में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर रोक लगाने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने मसालों के कारोबार को लेकर नए नियम जारी किए हैं। FDA आयुक्त IAS तुकाराम मुंढे (Tukaram Mundhe) के नेतृत्व में 15 अक्टूबर 2026 को जारी व्यापक अनुपालन आदेश का उद्देश्य मसालों की गुणवत्ता, स्वच्छता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए निर्देशों में मसालों के उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और बिक्री से जुड़े कारोबारियों के लिए नियम तय किए गए हैं।
महाराष्ट्र FDA ने मसालों में कृत्रिम रंग, प्रतिबंधित रसायन और अन्य बाहरी पदार्थों की मिलावट को रोकने पर जोर दिया है। विभाग के निर्देशों के मुताबिक, मसालों की गुणवत्ता से समझौता करने वाले और खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
FDA की नई व्यवस्था मसालों से जुड़े विभिन्न व्यवसायों पर लागू होती है। इसमें मसाला बनाने और पीसने वाली इकाइयां, पैकिंग करने वाले, थोक विक्रेता, वितरक, खुदरा दुकानदार, ऑनलाइन विक्रेता और मसालों का इस्तेमाल करने वाले खाद्य प्रतिष्ठान शामिल हैं।
FDA के नए निर्देशों के अनुसार, महाराष्ट्र में मसालों की बिक्री के लिए पैकेजिंग और लेबलिंग संबंधी नियमों का पालन करना होगा। खुले और बिना पैक किए मसालों की बिक्री पर रोक लगाने का उद्देश्य मिलावट, धूल, गंदगी और असुरक्षित भंडारण से होने वाले जोखिमों को कम करना है।
पैक किए गए मसालों पर आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए, ताकि ग्राहक उत्पाद की पहचान और गुणवत्ता से संबंधित विवरण जान सकें। कारोबारियों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों के अनुरूप पैकेजिंग करनी होगी।
मसालों की गुणवत्ता केवल उनके उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि उन्हें सुखाने और सुरक्षित रखने के तरीके पर भी निर्भर करती है। FDA के निर्देशों के तहत मसालों को ऐसी जगहों पर सुखाने से बचना होगा, जहां धूल, गंदगी, नालियों, कचरे या अन्य दूषित पदार्थों से संपर्क होने की आशंका हो।
मसालों को साफ और सूखी जगह पर रखना होगा। भंडारण क्षेत्र में जहरीले रसायनों, प्रतिबंधित कृत्रिम रंगों या अन्य दूषित पदार्थों की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। इन नियमों का मकसद उत्पादन से लेकर ग्राहक तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया में खाद्य सुरक्षा बनाए रखना है।
मसालों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल पर भी सख्ती की गई है। FDA के निर्देशों में एथिलीन ऑक्साइड के इस्तेमाल पर रोक का उल्लेख है। इसके अलावा मसालों में प्रतिबंधित कृत्रिम रंग और मिलावटी पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की जा सकती है।
मसाला कारोबारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों और उनकी गुणवत्ता से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध हों।
नए अनुपालन आदेश के तहत मसालों के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, वितरण और बिक्री से जुड़े कारोबारियों को अपने व्यवसाय के लिए आवश्यक वैध खाद्य सुरक्षा लाइसेंस या पंजीकरण रखना होगा।
कारोबारियों को स्वच्छता के नियमों का पालन करने और कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा संबंधी उचित प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यवसाय के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। गंभीर या बार-बार होने वाले उल्लंघनों के मामलों में लाइसेंस निलंबित या रद्द किए जाने की कार्रवाई भी संभव है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थों के कारोबार पर गंभीर कार्रवाई का प्रावधान है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र में मसालों से संबंधित नए निर्देशों के उल्लंघन पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना और कुछ गंभीर मामलों में सात वर्ष तक कारावास की सजा हो सकती है। हालांकि, वास्तविक दंड उल्लंघन की प्रकृति और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
महाराष्ट्र FDA खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने और नागरिकों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए ‘सेफ फूड, सेफ ड्रग्स’ अभियान चला रहा है। विभाग पहले भी दूध, पनीर, खाद्य तेल, होटल और रेस्तरां में खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच कर चुका है।
मसालों के कारोबार पर नए नियम इसी व्यापक निगरानी व्यवस्था का हिस्सा हैं। FDA की सख्ती से मसाला निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानदारों को अपने कारोबार में स्वच्छता, गुणवत्ता और वैधानिक अनुपालन पर अधिक ध्यान देना होगा। इसका अंतिम उद्देश्य उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और मानक गुणवत्ता वाले मसाले पहुंचाना है।






















