शिक्षकों की कई माँगें पूरी नहीं होने के चलते महाराष्ट्र में 12वीं कक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में हो सकती है देरी।
शिक्षक किसी भी देश के भविष्य के निर्माता होते हैं। सरकार को उनकी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करना चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि विभिन्न मांगों को लेकर शिक्षकों को आंदोलन करना पड़ता है जो छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को भी प्रभावित करता है।
महाराष्ट्र राज्य जूनियर कॉलेज शिक्षक संगठन (MJCTO) के नेतृत्व में शिक्षकों ने अपनी विभिन्न माँगों को लेकर 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का बहिष्कार शुरू कर दिया है। यह बहिष्कार 21 फरवरी से शुरू हुआ है, जिस दिन से 12वीं की परीक्षाएँ आरंभ हुई थीं। इससे परीक्षा के काम में देरी की आशंका है।
MJCTO के समन्वयक मुकुंद अंधालकर ने बताया कि बहिष्कार के कारण अंग्रेज़ी विषय के मूल्यांकन पर असर पड़ा है। अब जब तक बहिष्कार जारी रहेगा मूल्यांकन का काम रुका रहेगा। अध्यापकों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द उनकी समस्याओं का समाधान करे।
अध्यापकों का कहना है कि पिछले साल उन्होंने आंदोलन किया था, जिसके बाद सरकार ने उनकी कुछ माँगें मान ली थीं पर उन्हें अभी तक पूरा नहीं किया गया है। उनकी सबसे प्रमुख माँग 1 नवंबर 2005 से पहले नियुक्त हुए अध्यापकों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की है। अध्यापकों की अपील है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे।
एमजेसीटीओ ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार नहीं मानी, तो वे 12वीं कक्षा की परीक्षा का काम आगे नहीं बढ़ने देंगे। इसका सारा ज़िम्मा सरकार पर होगा।
आशा की जाती है कि सरकार जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगी ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका असर न पड़े।































