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बंगाल चुनाव से पहले ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’? चुनाव आयोग के पोर्टल पर भारी गड़बड़ी, दिग्गजों के नाम ‘गायब’ और ‘विचाराधीन’

डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजने के साथ ही एक अभूतपूर्व तकनीकी संकट खड़ा हो गया है। निर्वाचन आयोग (Election Commission) के आधिकारिक पोर्टल पर आई एक तकनीकी खामी ने राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। सोमवार आधी रात को पहली पूरक मतदाता सूची (Supplementary Voter List) जारी होने के ठीक 24 घंटे बाद, मंगलवार रात को लाखों मतदाताओं का स्टेटस अचानक बदल गया।|

1. हाई-प्रोफाइल नाम, चौंकाने वाले स्टेटस
इस तकनीकी गड़बड़ी की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के बड़े चेहरे भी नहीं बच सके।

* अभिषेक बनर्जी: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का नाम पोर्टल पर ‘अंडर एडजुडिकेशन’ (Under Adjudication) यानी विचाराधीन दिखाने लगा।
* सुवेंदु अधिकारी: राज्य के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का स्टेटस तो और भी चौंकाने वाला रहा; उनका नाम सूची से ‘डिलीट’ (Deleted) दिखाया गया।

2. लाखों मतदाता असमंजस में
जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में फैली, आम मतदाताओं के बीच हड़कंप मच गया। हजारों लोगों ने जब अपना वोटर आईडी नंबर पोर्टल पर चेक किया, तो उन्हें अपनी नागरिकता और मतदान के अधिकार को लेकर संशय होने लगा। कई क्षेत्रों में मतदाताओं का डेटा या तो गलत दिख रहा है या उसे प्रक्रिया के अधीन बताया जा रहा है।

3. राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
चुनाव से ठीक पहले आई इस गड़बड़ी ने राजनीतिक दलों को हमलावर होने का मौका दे दिया है:

* TMC का रुख: पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि मतदाताओं को डराने या भ्रमित करने की साजिश हो सकती है।
* BJP की प्रतिक्रिया: विपक्ष ने इसे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के साथ-साथ राज्य प्रशासन की ढिलाई से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है।

4. निर्वाचन आयोग की सफाई का इंतजार
आमतौर पर पूरक सूची जारी होने के बाद डेटा सिंक (Sync) होने में कुछ समय लगता है, लेकिन लाखों की संख्या में डेटा का गलत प्रदर्शित होना एक गंभीर सुरक्षा चूक या सर्वर फेलियर की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे जल्द ठीक नहीं किया गया, तो यह आगामी मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

5. क्या है ‘अंडर एडजुडिकेशन’ और ‘डिलीट’ का मतलब?
तकनीकी रूप से ‘अंडर एडजुडिकेशन’ का अर्थ है कि उस मतदाता के विवरण की अभी जांच चल रही है और वह अंतिम रूप से मान्य नहीं है। वहीं ‘डिलीट’ का अर्थ है कि उस व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हटा दिया गया है। लोकतंत्र में मतदान के अधिकार पर इस तरह का ‘डिजिटल ग्रहण’ बेहद संवेदनशील माना जाता है।

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